जयपुर, 16 सितंबर। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर जयपुर के बुजुर्ग दंपती से 76 लाख रुपये की ठगी के मामले में स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस महानिदेशक, राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा और अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस श्री विजय कुमार सिंह के निर्देशन में उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर निवासी आरोपी ताहिर को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में अब तक तीन आरोपियों को पकड़ा जा चुका है।

ठगों ने बुजुर्ग दंपती को व्हाट्सएप कॉल कर खुद को पुलिस, एटीएस और एनआईए का अधिकारी बताया था। आरोपियों ने दंपती को डराया कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग आतंकवादी गतिविधियों और करोड़ों रुपये के वित्तीय अपराध में किया गया है। गिरफ्तारी और गंभीर कार्रवाई की धमकी देकर आरोपियों ने व्हाट्सएप पर फर्जी एनआईए नोटिस भी भेजा। इसके बाद लगातार वॉयस और वीडियो कॉल कर दंपती पर मानसिक दबाव बनाया गया।

आरोपियों के दबाव में आकर बुजुर्ग दंपती ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वा दी और ठगों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में कुल 76 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के व्हाट्सएप नंबरों और संदिग्ध नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया। बैंक स्टेटमेंट की जांच में सामने आया कि ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था। ठगी की रकम में से 21 लाख रुपये हनिया फ्रुट्स फर्म के खाते में पहुंचे थे, जिसका संचालक मुजस्सिम है।

जांच में सामने आया कि मुजस्सिम ने रकम आगे ट्रांसफर कराने के लिए बैंक खातों की व्यवस्था करने को ताहिर से कहा था। इसके बाद ताहिर ने अपने परिचित सतपाल सिंह के जरिए अन्य बैंक खातों की जानकारी जुटाई। उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में करीब 17 लाख रुपये जमा करवाए गए।

सतपाल ने कमीशन काटने के बाद 7 लाख रुपये नकद ताहिर को दिए। इसमें से 5 लाख रुपये मुजस्सिम को मिले, जबकि 2 लाख रुपये ताहिर ने अपने पास रख लिए।

उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन तथा थानाधिकारी गजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ीं। टीम में पुलिस निरीक्षक अजय कुमार, हैड कॉन्स्टेबल अशोक कुमार, सच्चिदानंद और लेखराज शामिल रहे। तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची और कार्रवाई करते हुए ताहिर को गौतमबुद्ध नगर से गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने आमजन से अपील की है कि कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट कर धनराशि ट्रांसफर करने के निर्देश नहीं देती है। ऐसे फोन आने पर घबराने के बजाय सत्यापन करें और किसी के भी दबाव में धनराशि ट्रांसफर न करें। किसी भी साइबर ठगी की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 / 9257510100 या पोर्टल cybercrime.gov.in पर दी जा सकती है।

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