तस्वीर में जयपुर स्थित आयकर कार्यालय में आयोजित आउटरीच कार्यक्रम के दौरान अधिकारी बैठक कक्ष में चर्चा करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

जयपुर में आयकर निदेशालय (खुफिया एवं आपराधिक अन्वेषण), राजस्थान द्वारा आयकर कार्यालय, NCRB, जयपुर में महानिरीक्षक, पंजीयन एवं मुद्रांक, राजस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अचल संपत्ति के लेन-देन की वित्तीय लेन-देन विवरण (SFT) के अंतर्गत रिपोर्टिंग में अनुपालन को सुदृढ़ करना तथा उसकी शुद्धता और समयबद्धता में सुधार करना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती प्रतिभा मीना, आयकर निदेशक (I&CI), राजस्थान ने की। श्री शरद मेहरा, महानिरीक्षक, पंजीयन एवं मुद्रांक; श्री सूरज प्रकाश, मुख्य वित्तीय सलाहकार; श्री विवेक कुमार, अतिरिक्त महानिरीक्षक (प्रशासन), जयपुर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने विचार-विमर्श में भाग लिया। निदेशालय के विभिन्न स्थानों पर कार्यरत आयकर अधिकारियों तथा राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों के पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के DIG ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता की।

विचार-विमर्श के दौरान आयकर अधिनियम के उन नए प्रावधानों पर चर्चा की गई, जो DIT (I&CI) के कार्यों से संबंधित हैं। अचल संपत्ति के लेन-देन से संबंधित आंकड़ों की गुणवत्ता, SFT रिपोर्टिंग की पूर्णता एवं समयबद्धता तथा अनुपालन संबंधी कमियों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया गया।

पात्र लेन-देन में PAN का अनिवार्य उल्लेख, क्रेताओं एवं विक्रेताओं के PAN तथा अन्य पहचान संबंधी विवरणों का प्रणाली-आधारित सत्यापन और लेन-देन मूल्य सहित अन्य आवश्यक सूचनाओं के पंजीयन के समय सही अंकन पर विशेष बल दिया गया।

प्रतिभागियों ने स्रोत स्तर पर त्रुटियों को न्यूनतम करने तथा वैधानिक रिपोर्टिंग को अधिक सटीक बनाने के लिए तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक सुधारों पर भी चर्चा की। पंजीयन एवं मुदांक विभाग के अधिकारियों को आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत नए एवं संशोधित रिपोर्टिंग दायित्वों तथा प्रणाली और क्षेत्रीय स्तर पर आवश्यक तैयारियों के संबंध में अवगत कराया गया।

आयकर विभाग की ओर से श्रीमती सोनिया महाजन, अपर आयकर निदेशक (I&CI), जयपुर; श्री सुमित तिवारी, आयकर अधिकारी; श्री आशुतोष, आयकर अधिकारी तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के माध्यम से दोनों विभागों ने अंतर-विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने, वित्तीय सूचना रिपोर्टिंग की गुणवत्ता में सुधार लाने तथा राजस्थान में अचल संपत्ति के लेन-देन के लिए एक सुदृढ़, सटीक और प्रौद्योगिकी-सक्षम अनुपालन व्यवस्था विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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