तस्वीर में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

राजस्थान में कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस मुख्यालय में महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के पुलिस आयुक्त, रेंज महानिरीक्षक पुलिस, पुलिस उपायुक्त एवं जिला पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, अनुसंधान, विभागीय कार्यवाहियों और विभिन्न विशेष अभियानों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को प्रभावी एवं समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

बैठक में वर्ष 2024, 2025 एवं जुलाई 2026 तक अपराधों की तुलनात्मक स्थिति की समीक्षा की गई। संपत्ति संबंधी अपराधों में बरामदगी एवं चालानी प्रतिशत, महिला अत्याचार एवं पॉक्सो प्रकरणों की स्थिति तथा सनसनीखेज प्रकरणों में अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी ली गई। 60 एवं 90 दिवस में प्रकरणों के निस्तारण, ई-साक्ष्य तथा सम्मन की स्थिति पर भी चर्चा हुई।

डीजीपी श्री राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रभावी एवं निरंतर प्रयास किए जाएं। उन्होंने नवीन आपराधिक कानूनों के तहत आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी शिकंजा कसते हुए अपराधियों के विरुद्ध त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने ई-जीरो एफआईआर, दर्ज प्रकरणों का निर्धारित समयावधि में निस्तारण, ई-साक्ष्य आईडी की संख्या बढ़ाने तथा ई-सम्मन की तामील सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। डीजीपी ने इन व्यवस्थाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग करते हुए पुलिसिंग में तकनीक के अधिकाधिक उपयोग के निर्देश दिए।

बैठक में सभी महानिरीक्षक पुलिस एवं कमिश्नर ने अपनी-अपनी रेंज की अपराध स्थिति और पुलिस कार्रवाई से संबंधित प्रस्तुतीकरण दिया। प्रस्तुतियों में अपराधों की तुलनात्मक स्थिति, पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई तथा विभिन्न अभियानों की प्रगति से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी गई।

महिला अत्याचार एवं पॉक्सो प्रकरणों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित अनुसंधान पूरा करने, पीड़ितों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने तथा निर्धारित समयावधि में प्रकरणों का निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में सतर्कता शाखा से संबंधित विषयों पर भी विशेष चर्चा हुई। विभागीय कार्यवाही के प्रस्ताव एवं विभागीय जांच रिपोर्ट निर्धारित परिपत्र के अनुसार समय पर भेजने तथा लंबित विभागीय जांचों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए गए।

परिवीक्षा काल के दौरान 16/17 CCA के स्थान पर 38(ए) CCA के तहत कार्रवाई करने, न्यायालयों में लंबित मामलों में स्टे वैकेट करवाने तथा अपराध में संलिप्त पुलिस कार्मिकों के विरुद्ध लंबित विभागीय कार्यवाहियों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत विभागीय कार्यवाहियों के सक्षम स्तर से प्रभावी पर्यवेक्षण एवं लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए।

साइबर अपराधों के बढ़ते स्वरूप को देखते हुए जिलों में संचालित साइबर थानों में स्वीकृत पदों के विरुद्ध उपलब्ध स्टाफ की स्थिति की जानकारी ली गई। साइबर अपराधों में दर्ज एफआईआर एवं गिरफ्तारियों की तुलनात्मक स्थिति, म्यूल बैंक खातों एवं साइबर अपराध के हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान तथा साइबर अपराध में प्रयुक्त सिम कार्ड के हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर कार्रवाई की प्रगति पर चर्चा हुई।

साइबर स्लेवरी से जुड़े मामलों में एजेंटों एवं पीड़ितों के संबंध में की जा रही कार्रवाई को प्रभावी बनाने तथा अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क के विरुद्ध समन्वित कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए गए। OCWC/Tipline पर प्राप्त शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी जोर दिया गया।

एटीएस, एजीटीएफ एवं एएनटीएफ से जुड़े विषयों की समीक्षा के दौरान जिलों में नार्को-सेल के गठन, केंद्रीय एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय, NCORD पोर्टल पर बैठक संबंधी जानकारी नियमित रूप से अपलोड करने तथा वाणिज्यिक मात्रा वाले मादक पदार्थ मामलों में वित्तीय अनुसंधान को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

लक्ष्मण रेखा अभियान के तहत जिलों में अधिक से अधिक जनजागरूकता शिविर आयोजित करने तथा मानस पोर्टल पर लंबित परिवादों के त्वरित निस्तारण के निर्देश भी दिए गए।

संगठित अपराध और हार्डकोर अपराधियों पर भी बैठक में विशेष फोकस रहा। जिलों में हार्डकोर अपराधियों से संबंधित सीसीटीएनएस डाटा अपडेट रखने तथा ऑर्गेनाइज्ड क्राईम नेटवर्क डाटा (OCND) पोर्टल पर आवश्यक जानकारी समय पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए। विभिन्न अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियानों की प्रगति पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी एवं निरंतर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं से जुड़े डमी अभ्यर्थी, पेपर लीक, फर्जी डिग्री/प्रमाण-पत्र एवं नकल जैसे मामलों में पुलिस अधीक्षकों को व्यक्तिगत रूप से पर्यवेक्षण करने के निर्देश दिए गए। विभिन्न परीक्षाओं के दौरान निर्धारित एसओपी की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

इसके अलावा नेक्सा एवरग्रीन सिटी, आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी एवं आरजीएचएस से संबंधित लंबित अनुसंधानाधीन प्रकरणों की व्यक्तिगत निगरानी करने के निर्देश दिए गए।

सरकारी योजनाओं जैसे सम्मान निधि, जननी सुरक्षा एवं प्रधानमंत्री बीमा योजना आदि में होने वाली धोखाधड़ी के मामलों की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त कर विशेष सेल गठित करने के निर्देश दिए गए।

यातायात शाखा के अंतर्गत Next-Gen e-Challan System लागू करने की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को नई व्यवस्था के लिए आवश्यक तैयारियां समयबद्ध रूप से पूरी करने के निर्देश दिए गए।

पुलिसकर्मियों के कल्याण से जुड़े विषयों पर भी बैठक में चर्चा हुई। राजस्थान पुलिस पेंशन पोर्टल पर सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा दर्ज की जाने वाली शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण, राजस्थान पुलिस बेलेनेवेन्ट फंड की छात्रवृत्ति के आवेदन समय पर भिजवाने तथा नवनियुक्त रिक्रूट कांस्टेबलों को पुलिस सैलेरी पैकेज के अंतर्गत मिलने वाले विभिन्न लाभों के संबंध में भी जानकारी ली गई।

बैठक में अपराध नियंत्रण के मोर्चे पर कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए। वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2026 जुलाई तक कुल अपराधों में 17.25 प्रतिशत तथा संपत्ति संबंधी अपराधों में 32.32 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वर्ष 2025 की तुलना में वर्ष 2026 में पॉक्सो एक्ट मामलों में 21.56 प्रतिशत, डकैती में 25.49 प्रतिशत, लूट में 20.84 प्रतिशत, बालिग दुष्कर्म में 10.67 प्रतिशत और हत्या के प्रयास में 9.81 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

20 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक चले विशेष अभियान में 1,248 वांछित/संगठित अपराधी गिरफ्तार किए गए। इसके अलावा एनडीपीएस के 614, आर्म्स एक्ट के 226 और अवैध खनन के 474 प्रकरण दर्ज किए गए तथा 426 साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गए।

विशेष व स्थानीय कानूनों (SLL) में 5.57 प्रतिशत अधिक कार्रवाई हुई। यातायात नियंत्रण के तहत कुल 3,73,104 कार्यवाहियां की गईं, जिनमें 1,69,089 एमवी एक्ट, 87,357 बिना हेलमेट और 80,023 ओवर-स्पीडिंग की कार्यवाहियां शामिल हैं।

डिजिटल सुरक्षा के मोर्चे पर सोशल मीडिया पर महिला/बाल अपराध की 98.8 प्रतिशत और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली 88.8 प्रतिशत पोस्ट्स टेक-डाउन कराई गईं। नए आपराधिक कानूनों और ई-गवर्नेंस क्रियान्वयन में राजस्थान बड़े राज्यों में द्वितीय स्थान पर रहा। राज्य की Overall Rank 8 और Score 86.11 रहा, जबकि ITSSO अनुपालन दर 91.3 प्रतिशत दर्ज हुई।

बैठक में डीजी लॉ एंड ऑर्डर श्री संजय अग्रवाल सहित समस्त एडीजी मौजूद रहे। एडीजी बिपिन कुमार पांडे ने बैठक एजेंडा प्रस्तुत किया।

समापन पर डीजीपी श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, आमजन की सुरक्षा और पुलिसिंग में जवाबदेही राजस्थान पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जिलों में अपराध की प्रवृत्तियों का लगातार विश्लेषण कर प्रभावी रणनीति बनाने, लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने तथा पुलिस कार्यप्रणाली में तकनीक और जनसहभागिता का अधिकतम उपयोग करने पर जोर दिया।

Tags: