सिंधी समाज के 40 दिवसीय झूलेलाल चालीहा साहिब का सोमवार को होगा भव्य समापन
जयपुर में 40 दिवसीय झूलेलाल चालीहा साहिब का 24 अगस्त को भव्य समापन होगा। 151 बहिराणा साहिब ज्योत यात्रा सहित कई आयोजन होंगे।
तस्वीर में जयपुर के एक मंदिर में भगवान श्री झूलेलाल के चालीहा साहिब अनुष्ठान के दौरान सजाई गई वेदी और पूजा स्थल दिखाई दे रहे हैं।
सिंधी समाज की आस्था और धार्मिक परंपरा के प्रमुख पर्व भगवान श्री झूलेलाल चालीहा साहिब का 40 दिवसीय अनुष्ठान सोमवार, 24 अगस्त को भव्य धार्मिक आयोजनों के साथ सम्पन्न होगा। इस अवसर पर जयपुर के विभिन्न झूलेलाल मंदिरों में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
समाज के तुलसी संगतानी ने बताया कि सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश के अवसर पर 16 जुलाई को शुरू हुआ 40 दिवसीय चालीहा साहिब का अनुष्ठान 24 अगस्त को सम्पन्न होगा। चालीहा साहिब के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्री झूलेलाल की आराधना, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, बहिराणा साहिब की पूजा, अखो पूजा और पल्लव प्रार्थना में भाग लिया।
सिंधी समाज में चालीहा साहिब को भक्ति, तपस्या, आत्मशुद्धि, संकल्प और भगवान झूलेलाल के प्रति समर्पण का पर्व माना जाता है। रविवार को सेक्टर 62, रजत पथ, मानसरोवर स्थित झूलेलाल मंदिर में भगवान श्री झूलेलाल पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और भजन अंत्याक्षरी का आयोजन किया गया।
मालवीय नगर स्थित सेक्टर एक श्री झूलेलाल मंदिर में महाआरती आयोजित की गई। मंदिर के धर्मदास मोटवानी ने बताया कि दीदी भारती खुशलानी ने भक्ति संगीत प्रस्तुत कर भगवान को रिझाया। राजापार्क सिंधी कॉलोनी श्री झूलेलाल मंदिर के अध्यक्ष प्रेम चंद कुंदनानी ने बताया कि मंदिर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और नाटक भी प्रस्तुत किया गया। इन आयोजनों में समाज के बच्चों, युवाओं और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भागीदारी हो रही है।
24 अगस्त को रजत पथ स्थित झूलेलाल मंदिर में चालीहा साहिब के समापन अवसर पर 151 बहिराणा साहिब ज्योत यात्रा निकाली जाएगी। आयोजक प्रदीप मोटवानी ने बताया कि 151 थालों में दीप प्रज्ज्वलित कर पूजन सामग्री सहित भगवान की प्रतिमा रखी जाएगी, जिसे मस्तक पर धारण कर यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद भगवान श्री झूलेलाल चालीहा साहिब का विसर्जन एवं समापन कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए आम भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।
सिंधी समाज के लिए चालीहा साहिब केवल 40 दिनों की धार्मिक साधना नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और सामाजिक एकता को मजबूत करने का अवसर भी है। चालीहा के दौरान श्रद्धालु भगवान झूलेलाल के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने के साथ समाज में प्रेम, सेवा, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देते हैं।
भगवान झूलेलाल को सिंधी समाज का आराध्य देव माना जाता है। चालीहा साहिब की परंपरा के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान झूलेलाल की शिक्षाओं और सिंधी संस्कृति से जोड़ने का प्रयास भी किया जाता है। समापन अवसर पर सिंधी समाज भगवान श्री झूलेलाल के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए पल्लव प्रार्थना करेगा और परिवार, समाज तथा देश में सुख-शांति और समृद्धि की मंगल कामना करेगा।