भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार के साथ साइबर धोखाधड़ी का दायरा और उसकी जटिलता भी लगातार बढ़ रही है। इसी बीच एयरटेल ने पिछले दो वर्षों में अपने एआई-संचालित ‘सेफ नेटवर्क’ इनिशिएटिव के तहत 98.4 बिलियन से अधिक स्पैम कॉल और 4.4 बिलियन स्पैम मैसेज की पहचान की है। कंपनी के अनुसार, इस दौरान 1.62 मिलियन से अधिक दुर्भावनापूर्ण लिंक भी ब्लॉक किए गए हैं।

28 सितंबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, साइबर खतरा अब केवल स्पैम कॉल और फ़िशिंग मैसेज तक सीमित नहीं रहा है। दूसरे की पहचान चुराकर ठगी करने वाले स्कैम, फर्जी बैंकिंग अनुरोध, दुर्भावनापूर्ण लिंक, निवेश से जुड़े फ्रॉड और ओटीपी के जरिए होने वाली वित्तीय ठगी इसका हिस्सा बन चुके हैं।

सरकार और उद्योग के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि यह खतरा व्यापक होने के साथ तेजी से संगठित भी हो रहा है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के अनुसार, पिछले छह वर्षों में भारतीयों को साइबर धोखाधड़ी के कारण ₹52,976 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े भी दर्शाते हैं कि देश में कुल अपराध के स्तर में गिरावट आने के बावजूद साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बैंकिंग, पेमेंट्स, हेल्थकेयर, कॉमर्स और सरकारी सेवाओं में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी में लगातार गहरा रहा है। ऐसे में टेलीकॉम नेटवर्कों से डिजिटल सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने की अपेक्षा की जा रही है। उपयोगकर्ता अब नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर से केवल कनेक्टिविटी ही नहीं, बल्कि डिजिटल संचार से जुड़े जोखिमों की पहचान और उन्हें कम करने की व्यवस्था की भी अपेक्षा रखते हैं।

एयरटेल ने दो वर्ष पहले इस बदलाव को समझते हुए ग्राहक सुरक्षा के क्षेत्र में फर्स्ट-मूवर अप्रोच अपनाया। सितंबर 2024 में एयरटेल ने भारत का पहला नेटवर्क-आधारित, एआई-संचालित स्पैम डिटेक्शन सॉल्यूशन लॉन्च किया था। यह नेटवर्क इंटेलिजेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक साथ लाकर ग्राहकों को स्पैम कॉल और एसएमएस से सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया गया था।

इसके बाद पिछले 2 वर्षों में एयरटेल ने अपने एआई-संचालित सेफ नेटवर्क इनिशिएटिव का विस्तार किया। यह नेटवर्क स्तर पर धोखाधड़ी की रोकथाम की दिशा में कंपनी के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इसका उद्देश्य ऐसी सुरक्षा प्रणालियां तैयार करना है, जो बैकग्राउंड में काम करें और ग्राहकों को अतिरिक्त ऐप इंस्टॉल करने या खतरों की मैन्युअल रिपोर्टिंग करने की आवश्यकता न पड़े।

एयरटेल का सेफ नेटवर्क अब नेटवर्क-आधारित डिजिटल सुरक्षा टूल्स के व्यापक सेट के रूप में विकसित हो चुका है। इसके तहत ओटीपी से जुड़ी धोखाधड़ी से सुरक्षा के लिए एयरटेल ने एआई-आधारित सुरक्षा लॉन्च की है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि संदिग्ध बातचीत के दौरान यूजर्स को ओटीपी या अन्य संवेदनशील क्रेडेंशियल्स साझा करने के लिए बरगलाए जाने वाली स्थितियों की पहचान कर हस्तक्षेप किया जा सके।

हानिकारक लिंक की पहचान के लिए एयरटेल ने ओटीपी धोखाधड़ी की पहचान प्रणाली शुरू करने से पहले ही वास्तविक समय में फर्जी वेबसाइटों और संदिग्ध लिंक की पहचान करने वाली प्रणाली शुरू की थी। कंपनी के अनुसार, इसे लागू किए जाने के बाद से सभी मोबाइल और वाई-फाई ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स के लिए एसएमएस, मैसेजिंग ऐप्स, ईमेल और ब्राउज़र रीडायरेक्ट के जरिए साझा किए गए 1.62 मिलियन से अधिक दुर्भावनापूर्ण लिंक ब्लॉक किए जा चुके हैं।

स्पैम कॉल और मैसेज की पहचान के लिए सितंबर 2024 में नेटवर्क स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्पैम पहचान प्रणाली लॉन्च की गई। कंपनी के अनुसार, तब से 98.4 बिलियन से अधिक स्पैम कॉल और 4.4 बिलियन स्पैम मैसेज की पहचान की जा चुकी है।

एयरटेल ने बिज़नेस नेम डिस्प्ले सुविधा भी शुरू की है। इसके जरिए उपयोगकर्ता सत्यापित एंटरप्राइज कॉल्स और संभावित रूप से फर्जी या धोखाधड़ी वाले नंबरों के बीच अंतर कर सकते हैं। इससे फर्जी बैंकिंग और ग्राहक सेवा प्रतिनिधियों से जुड़ी प्रतिरूपण आधारित धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।

एयरटेल की सुरक्षित नेटवर्क पहल दूरसंचार उद्योग में हो रहे उस व्यापक बदलाव को दर्शाती है, जिसमें नेटवर्क से केवल संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय भारत के तेजी से विस्तार करते डिजिटल तंत्र को सुरक्षित रखने में भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की जा रही है।

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