जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र की बैठक में 22 देशों के प्रतिनिधियों ने सूडान संकट पर चर्चा की।

सूडान में अप्रैल 2023 से जारी सेना और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने स्पष्ट कर दिया है कि इस संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है। जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र की बैठक में 22 देशों के प्रतिनिधियों ने तत्काल मानवीय संघर्षविराम, विदेशी हस्तक्षेप समाप्त करने और राजनीतिक समझौते की दिशा में नए सिरे से प्रयास करने की मांग की। बैठक में चेतावनी दी गई कि युद्ध में सैन्य बढ़त हासिल करने की कोशिशों की सबसे बड़ी कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ रही है।

यह अपील सूडान में शांति पहलों और प्रयासों के समन्वय को मजबूत करने के लिए आयोजित छठी परामर्श बैठक के समापन पर जारी अंतिम बयान में की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता स्विट्जरलैंड के विदेश मामलों के राज्य सचिव अलेक्जेंड्रे फैसल (Alexandre Fasel) और सूडान के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के निजी दूत पेक्का हाविस्तो (Pekka Haavisto) ने की। बुधवार शाम समाप्त हुई इस बैठक में दोनों संघर्षरत पक्षों से तनाव कम करने और स्थायी संघर्षविराम की दिशा में गंभीरता से बातचीत करने का आग्रह किया गया।

बैठक में अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, रूस और सूडान के पड़ोसी देशों सहित 22 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा अफ्रीकी संघ, यूरोपीय संघ और विकास पर अंतरसरकारी प्राधिकरण (IGAD) जैसे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि मानवीय संघर्षविराम स्थायी युद्धविराम का आधार बनना चाहिए। तनाव कम करने के प्रयासों का असर जमीन पर दिखाई देना भी जरूरी है। साढ़े तीन साल से जारी लड़ाई के बाद प्रतिभागियों ने सैन्य बढ़त को समाधान मानने से इनकार करते हुए कहा कि लगातार जारी शत्रुता से आम नागरिकों को विनाशकारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों के तहत विश्वास बहाली के उपायों पर भी चर्चा हुई। पेक्का हाविस्तो ने ऐसे कदमों का उल्लेख किया, जिन्हें संघर्षरत दोनों पक्ष स्वीकार कर सकते हैं। इनमें युद्धबंदियों और हिरासत में रखे गए लोगों, सैन्यकर्मियों तथा नागरिकों की अदला-बदली और विद्यार्थियों को परीक्षाओं में शामिल होने की व्यवस्था करना शामिल है।

हाविस्तो ने कहा, “हमारा मानना है कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें वास्तव में संघर्ष के दोनों पक्षों को एकजुट करना चाहिए।” उन्होंने युद्ध से हुई व्यापक तबाही की तुलना में इन पहलों को शुरुआती और सीमित कदम बताया।

प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पूरी तरह पालन करने और नागरिक सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इसमें विशेष रूप से बुनियादी सेवाओं के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की रक्षा पर जोर दिया गया। बैठक में राज्यों और अन्य पक्षों से भाड़े के लड़ाकों, सैन्य उपकरणों, ड्रोन या वित्तीय सहायता की आपूर्ति के जरिए संघर्ष को बढ़ावा देना बंद करने का आह्वान किया गया।

अंतिम बयान में चेतावनी दी गई कि इस तरह की सहायता से और अधिक लोगों की जान जा सकती है तथा सूडान के विभाजन का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, बयान में संघर्षरत पक्षों को सहायता देने के लिए जिम्मेदार किसी देश या संगठन का नाम नहीं बताया गया।

बैठक में सूडान की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही देश की सरकारी संस्थाओं को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने समानांतर सरकारों, संस्थाओं या शासन संरचनाओं के गठन को खारिज करते हुए ऐसे कदमों को रोकने के लिए ठोस उपाय करने की मांग की, जो देश की एकता को कमजोर कर सकते हैं।

जिनेवा में हुई बातचीत में इस बात पर भी सहमति जताई गई कि स्थायी शांति के लिए सूडान में एक विश्वसनीय और समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया जरूरी है, जो वहां की आबादी की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करे। इस प्रक्रिया में राजनीतिक और नागरिक समूहों के साथ महिलाओं तथा युवाओं की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई। इसका उद्देश्य टिकाऊ शांति और लोकतांत्रिक शासन की दिशा में सहमतिपूर्ण परिवर्तन का रास्ता तैयार करना है।

प्रतिभागियों ने क्वाड समूह की मध्यस्थता पहलों का समर्थन किया। इस समूह में अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र शामिल हैं। इसके साथ ही क्विंटेट की कोशिशों को भी समर्थन दिया गया, जिसमें अफ्रीकी संघ, यूरोपीय संघ, IGAD, अरब लीग और संयुक्त राष्ट्र शामिल हैं। बैठक में कहा गया कि किसी भी राजनीतिक प्रक्रिया को पारदर्शी, विश्वसनीय और दबाव से मुक्त होना चाहिए।

बैठक में लगातार जारी संघर्ष, अत्याचारों की खबरों और ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। सूडान में लाखों लोग भोजन की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। मानवीय सहायता पहुंचाने पर प्रतिबंधों और प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों ने अकाल का खतरा और बढ़ा दिया है।

युद्ध के मानवीय, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव सूडान के पड़ोसी देशों में भी महसूस किए जा रहे हैं। इससे हिंसा के सूडान की सीमाओं से बाहर फैलने की आशंका बढ़ी है, जिसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।

जिनेवा में हुई परामर्श बैठक से पहले काहिरा, जिबूती, नौआकशॉट और ब्रुसेल्स में भी इसी तरह की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इस श्रृंखला की पिछली बैठक 14 जनवरी को मिस्र की राजधानी काहिरा में हुई थी। मौजूदा पहल का उद्देश्य सूडान में गहराते मानवीय संकट के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

सहायता संगठनों के अनुमान के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से 2,00,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 1.3 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। इसके चलते सूडान दुनिया के सबसे बड़े भूख और विस्थापन संकट का केंद्र बन गया है।

बैठक में पिछले अप्रैल में बर्लिन में आयोजित सूडान पर मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में अपनाए गए सिद्धांतों और मई 2023 की जेद्दा घोषणा की भावना के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। जेद्दा घोषणा के तहत सूडान की सेना और RSF ने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मानवीय सहायता की पहुंच आसान बनाने का वादा किया था। जिनेवा बैठक का संदेश स्पष्ट रहा कि सूडान में स्थायी शांति के लिए सैन्य कार्रवाई के बजाय संघर्षविराम, मानवीय सहायता और समावेशी राजनीतिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।