इटली में लागू हुआ 'योगी स्टाइल' सख्त कानून:हिंसक प्रदर्शनों से निपटने के लिए उठाया अब तक का सबसे कड़ा कदम|
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और हिंसक प्रदर्शनों को रोकने के लिए जेल और भारी जुर्माने के नए प्रावधान लागू किए हैं।
इटली में हिंसक प्रदर्शनों और उपद्रव को रोकने के लिए नए सुरक्षा कानूनों की घोषणा करतीं प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने देश में हिंसक प्रदर्शनों और उपद्रव से सख्ती से निपटने के लिए एक नया और कड़ा सुरक्षा कानून लागू किया है। मंगलवार को इस नए आदेश की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री मेलोनी ने स्पष्ट किया कि किसी भी विरोध प्रदर्शन के नाम पर तोड़फोड़, हिंसा और चोरी जैसी वारदातों को सही नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने इस तरह की हरकतों को पूरी तरह से आपराधिक कृत्य करार दिया है और इसमें शामिल लोगों के लिए बेहद कड़ी सजा के प्रावधान किए गए हैं। ये नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
इन नए नियमों के तहत यदि कोई भी व्यक्ति कम से कम पाँच लोगों के ऐसे किसी समूह का हिस्सा बनता है, जो किसी प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है, तो उसे पाँच साल तक की जेल की सजा और 20,000 यूरो यानी लगभग 21,24,000 रुपये तक का भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। इसके अलावा यदि कोई प्रदर्शनकारी हिंसा के दौरान अपना चेहरा छिपाता है या किसी को घायल करता है, तो उसके खिलाफ सजा के प्रावधान और भी अधिक सख्त कर दिए गए हैं। इस कानून के तहत अधिकारियों को यह विशेष अधिकार भी दिया गया है कि वे हिंसा और उपद्रव के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को हुए नुकसान की तुरंत भरपाई का आदेश जारी कर सकें।
इस कानून का एक सबसे कड़ा पहलू नाबालिगों और उनके माता-पिता से जुड़ा हुआ है। यदि इस तरह की तोड़फोड़ या लूटपाट की घटनाओं में कोई नाबालिग शामिल पाया जाता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर उनके माता-पिता को जिम्मेदार माना जाएगा और उन्हें भारी जुर्माना भरना होगा। इसके साथ ही पुलिस को यह अधिकार भी दिया गया है कि वह 14 से 17 साल तक के किशोरों को भी अपनी हिरासत में ले सके। भले ही उन किशोरों ने कोई प्रत्यक्ष अपराध न किया हो, लेकिन यदि अधिकारियों को यह अंदेशा होता है कि उनसे किसी प्रकार का खतरा हो सकता है, तो पुलिस उन्हें हिरासत में ले सकती है। अब तक इस तरह की कार्रवाई केवल वयस्कों के खिलाफ ही की जा सकती थी।
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी द्वारा उठाए गए ये सख्त कदम ऐसे समय में सामने आए हैं, जब बीते सप्ताह के आखिर में देश के उत्तरी हिस्सों में कई प्रदर्शनों के दौरान भारी हिंसा देखने को मिली थी। इस हिंसा की चपेट में इटली की आर्थिक राजधानी के रूप में पहचान रखने वाला प्रमुख शहर मिलान भी शामिल था। मिलान शहर में बड़ी संख्या में युवाओं ने जमकर उत्पात मचाया था, सड़कों पर तोड़फोड़ की थी, दुकानों में लूटपाट की घटनाओं को अंजाम दिया था और वहां तैनात पुलिसकर्मियों पर भी हमले किए थे। इन सभी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए ही सरकार ने यह सख्त रुख अपनाया है।