पाकिस्तान को मिली 'बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म' की कमान, UNCTAD सचिवालय संचालित
खुद विदेशी कर्ज से जूझ रहे पाकिस्तान को UNCTAD समर्थित विकासशील देशों के 'बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म' का अध्यक्ष बनाया गया है, जो कर्ज प्रबंधन पर तकनीकी सहयोग देगा।
बैंकाक में विश्व बैंक बैठक के दौरान पाकिस्तान को बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म की कमान मिली।
खुद भारी विदेशी कर्ज और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान को अब विकासशील देशों के एक अंतरराष्ट्रीय कर्जदार मंच की कमान सौंपी गई है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने 12 अक्टूबर 2026 को बैंकॉक में विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की वार्षिक बैठकों के दौरान संयुक्त राष्ट्र समर्थित ‘बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म’ की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष का पद संभाला। यह मंच विकासशील देशों को कर्ज प्रबंधन और आर्थिक सुधारों से जुड़े अनुभव साझा करने में मदद करता है।
पाकिस्तान को यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब उसकी अर्थव्यवस्था विदेशी कर्ज, ब्याज भुगतान और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता पर निर्भरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक देश का कुल बाहरी कर्ज और देनदारियां लगभग 137.55 अरब डॉलर थीं। पाकिस्तान इससे पहले भी भुगतान संकट से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से वित्तीय सहायता लेता रहा है।
‘बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म’ की शुरुआत अप्रैल 2026 में हुई थी। इसका उद्देश्य विकासशील देशों को कर्ज प्रबंधन की बेहतर नीतियां अपनाने, आर्थिक सुधारों से जुड़े अनुभव साझा करने और विकास परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने के नए तरीके तलाशने में सहयोग देना है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) इस मंच के सचिवालय की भूमिका निभाता है।
हालांकि, इस मंच की अध्यक्षता मिलने का अर्थ यह नहीं है कि पाकिस्तान को अपने कर्ज में स्वतः राहत मिल जाएगी। यह मंच कर्जदाता देशों और संस्थानों के साथ सामूहिक मोलभाव करने या कर्ज माफी दिलाने के उद्देश्य से नहीं बनाया गया है। इसका मुख्य जोर तकनीकी सहयोग और अनुभव साझा करने पर है।
पाकिस्तान ने 2026-27 के लिए अपनी कार्ययोजना में कर्ज प्रबंधन को मजबूत करने, आर्थिक सुधारों से जुड़े अनुभव साझा करने और विकास के लिए नए वित्तीय साधन तलाशने को प्राथमिकता दी है। इस जिम्मेदारी के तहत पाकिस्तान को अन्य विकासशील देशों के साथ मिलकर यह समझने का अवसर मिलेगा कि कर्ज का इस्तेमाल आर्थिक विकास के लिए किस तरह किया जाए और अत्यधिक कर्ज से जुड़े जोखिमों को कैसे कम किया जाए।
इस प्रकार, भारी विदेशी कर्ज और वित्तीय सहायता पर निर्भरता के बीच पाकिस्तान को वैश्विक कर्जदार मंच का नेतृत्व मिला है। हालांकि, इस भूमिका का वास्तविक उद्देश्य कर्ज माफी सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि विकासशील देशों के बीच कर्ज प्रबंधन, आर्थिक सुधार और वित्त जुटाने के तरीकों पर सहयोग बढ़ाना है।