सोने की कीमतें गिरीं: क्रूड ऑयल और फेडरल रिजर्व के फैसलों का असर
मध्य पूर्व में तनाव और कच्चे तेल में तेजी के कारण सोने के दाम घिरे, जबकि चांदी और प्लैटिनम में बढ़त दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल और फेडरल रिजर्व के फैसलों से सोने के दाम घिरे।
20 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने की आशंका गहराई है, वहीं अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं। इन परिस्थितियों ने सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल है कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों में सोने को लेकर क्या रणनीति अपनानी चाहिए।
0621 GMT तक स्पॉट गोल्ड 0.3 प्रतिशत गिरकर 4,128.92 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, दिसंबर डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स की कीमत भी 0.3 प्रतिशत घटकर 4,148.50 डॉलर पर पहुंच गई।
Capital.com के सीनियर फाइनेंशियल मार्केट एनालिस्ट काइल रोडा ने कहा कि मध्य पूर्व में कुछ भू-राजनीतिक मुद्दों के भड़कने से तेल की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव पड़ा है। इसका असर सप्ताह की शुरुआत में सोने की कीमतों पर भी दिखाई दिया।
दरअसल, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच ब्रेंट क्रूड पांच महीने के उच्चतम स्तर के आसपास पहुंच गया है। यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार को सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों पर कई हमले करने का दावा किया। इससे बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम का प्रीमियम बढ़ गया है।
तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई को लेकर चिंताएं भी बढ़ती हैं। ऐसी स्थिति में आशंका रहती है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। सोने को आमतौर पर महंगाई से बचाव के साधन के रूप में देखा जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें इसे निवेश के लिहाज से कम आकर्षक बना देती हैं। इसकी वजह यह है कि सोने से नियमित ब्याज नहीं मिलता और ब्याज दरें ऊंची रहने पर इसे अपने पास रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है।
हालांकि, फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की हालिया टिप्पणियों से संकेत मिले हैं कि वे मौद्रिक नीति को सख्त करने के मामले में जल्दबाजी नहीं करना चाहते। इससे 27-28 अक्टूबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की नीति बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाओं को लेकर उम्मीदें कुछ कम हुई हैं।
इसके बावजूद CME के 'फेडवॉच टूल' के अनुसार, ट्रेडर्स को दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की 92 प्रतिशत संभावना दिखाई दे रही है। काइल रोडा ने कहा कि फेडरल रिजर्व का फैसला चाहे जो भी हो, बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अगर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करता है, तो शुरुआती प्रतिक्रिया सोने के पक्ष में हो सकती है।
इस बीच, बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा ने कहा कि जापान में अंतर्निहित महंगाई दर केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के लक्ष्य के काफी करीब है। दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भारी मांग और श्रम बाजार में कामगारों की कमी के कारण महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। इससे भविष्य में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की गुंजाइश बनी हुई है।
कीमती धातुओं के कारोबार में सोने के विपरीत चांदी और प्लैटिनम में तेजी दर्ज की गई। स्पॉट चांदी 0.5 प्रतिशत बढ़कर 57.38 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि प्लैटिनम 0.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,647.05 डॉलर पर पहुंच गया। इसके उलट पैलेडियम 0.5 प्रतिशत गिरकर 1,114.50 डॉलर पर आ गया।
कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई की आशंकाओं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसलों के बीच सोने की दिशा पर दबाव बना हुआ है। आने वाली मौद्रिक नीति बैठक और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े संकेत निवेशकों के लिए अहम रहेंगे।