उत्तर प्रदेश में जल्द दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, दिल्ली से आगरा का सफर 59 मिनट में होगा पूरा
उत्तर प्रदेश में जल्द बुलेट ट्रेन कॉरिडोर आने वाला है। अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली से आगरा, लखनऊ, कानपुर और काशी के बीच यात्रा समय की जानकारी दी। जानें काशी स्टेशन पुनर्विकास और नमो गंगा पुल की पूरी जानकारी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ट्रेन का निरीक्षण करते हुए।
उत्तर प्रदेश में जल्द ही बुलेट ट्रेन कॉरिडोर आने वाला है। दिल्ली से गुवाहाटी तक प्रस्तावित इस उत्तरी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के बनने से दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, काशी और पटना के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने उत्तरी बुलेट कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बुलेट ट्रेन अमीरों के लिए ही नहीं, बल्कि गरीब और मध्यम परिवारों के लिए भी होगी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों और गंगा नदी पर निर्माणाधीन नमो गंगा रेल-सह-सड़क पुल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्टेशन के आधुनिकीकरण, यात्री सुविधाओं और निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। साथ ही अधिकारियों से परियोजनाओं के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।
रेल मंत्री ने बताया कि दिल्ली से गुवाहाटी तक बनने वाले उत्तरी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के शुरू होने से विभिन्न शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। प्रस्तावित कॉरिडोर के तहत दिल्ली से आगरा के बीच की दूरी महज 59 मिनट में तय की जा सकेगी। दिल्ली से कानपुर पहुंचने में 1 घंटा 59 मिनट और दिल्ली से लखनऊ पहुंचने में 2 घंटे 12 मिनट लगेंगे।
इसी तरह काशी से लखनऊ की दूरी 1 घंटे 21 मिनट और काशी से पटना की दूरी 1 घंटे में तय की जा सकेगी। काशी से दिल्ली पहुंचने में 3 घंटे 35 मिनट और वाराणसी से आगरा पहुंचने में 2 घंटे 24 मिनट लगेंगे।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन को लेकर विपक्ष किराए के संबंध में भ्रम फैला रहा है। उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन अमीरों के लिए नहीं, बल्कि गरीब और मध्यम परिवारों के लोगों के लिए भी है। किराए को लेकर उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन का किराया फ्लाइट से भी कम होगा।
काशी रेलवे स्टेशन का 349.50 करोड़ रुपये से होगा पुनर्विकास
रेल मंत्री ने काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों का निरीक्षण करते हुए बताया कि स्टेशन को आधुनिक, विश्वस्तरीय और यात्री अनुकूल स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना की स्वीकृत अनुमानित लागत 349.50 करोड़ रुपये है, जबकि 304.61 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य आवंटित किया गया है। कार्य आवंटन की तिथि 16 अगस्त, 2023 है। परियोजना का निष्पादन उत्तर रेलवे के निर्माण संगठन की संबंधित इकाई द्वारा किया जा रहा है।
पुनर्विकास योजना के तहत स्टेशन के उत्तर और दक्षिण दिशा में दो आधुनिक स्टेशन भवन बनाए जा रहे हैं। दोनों भवन जी+2 यानी ग्राउंड प्लस दो मंजिल के होंगे। प्रत्येक भवन का क्षेत्रफल लगभग 10,358 वर्ग मीटर होगा। इसके अलावा करीब 10,622 वर्ग मीटर क्षेत्र में विशाल कॉनकोर्स का निर्माण किया जा रहा है।
यात्रियों की सुगम आवाजाही के लिए 9 मीटर चौड़ा फुट ओवर ब्रिज बनाया जा रहा है। परियोजना में नए प्लेटफॉर्म, प्लेटफॉर्म शेड और कवरिंग, पैदल यात्रियों के लिए कवर्ड पाथवे तथा कॉनकोर्स के ऊपर रूफिंग सहित अन्य विकास कार्य भी शामिल हैं।
4 रेलवे ट्रैक बढ़कर 10 होंगे, प्लेटफॉर्म की संख्या 6 तक पहुंचेगी
काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास के बाद इसकी परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वर्तमान में स्टेशन पर 4 रेलवे ट्रैक उपलब्ध हैं, जिन्हें बढ़ाकर 10 किया जाएगा। इसी तरह प्लेटफॉर्म की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की जाएगी। प्रत्येक प्लेटफॉर्म की लंबाई 600 मीटर होगी।
वर्तमान में स्टेशन पर प्रतिदिन लगभग 1,954 यात्रियों की तुलना में पुनर्विकास के बाद यह क्षमता बढ़कर 13,261 यात्री प्रतिदिन हो जाएगी। वहीं, स्टेशन से संचालित होने वाली ट्रेनों की संख्या वर्तमान 16 जोड़ी से बढ़कर 36 जोड़ी तक हो सकेगी।
30 लिफ्ट और 23 एस्केलेटर की होगी व्यवस्था
यात्रियों की सुविधा और सुगम आवागमन के लिए स्टेशन पर 30 लिफ्ट और 23 एस्केलेटर लगाए जाएंगे। फुट ओवर ब्रिज की चौड़ाई वर्तमान 6 मीटर से बढ़ाकर 9 मीटर की जाएगी। इसके साथ ही सीढ़ियों की संख्या 3 से बढ़ाकर 26 की जाएगी।
इन सुविधाओं से यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक पहुंचने और स्टेशन के विभिन्न हिस्सों में आवागमन करने में सुविधा होगी।
स्टेशन के उत्तर और दक्षिण भवनों में लगभग 2,300-2,300 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के प्रतीक्षालय विकसित किए जाएंगे। इनमें प्रत्येक भवन में करीब 650 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी।
इसके अतिरिक्त लगभग 5,114 वर्ग मीटर के कॉनकोर्स क्षेत्र में करीब 1,800 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी। इस प्रकार कुल लगभग 9,714 वर्ग मीटर क्षेत्र में करीब 3,100 यात्रियों के बैठने की सुविधा उपलब्ध होगी।
पार्किंग क्षमता 115 से बढ़कर 440 ईसीएस होगी
स्टेशन परिसर में पार्किंग व्यवस्था का भी विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में यहां 115 ईसीएस यानी इक्विवेलेंट कार स्पेस की पार्किंग सुविधा उपलब्ध है। पुनर्विकास के तहत लगभग 10,175 वर्ग मीटर क्षेत्र में 440 ईसीएस की पार्किंग विकसित की जाएगी।
भविष्य में इस क्षमता को 800 ईसीएस तक विस्तारित करने की योजना भी प्रस्तावित है।
स्टेशन परिसर में लगभग 66,758 वर्ग मीटर क्षेत्र में बाहरी विकास कार्य किए जाएंगे। इसके अलावा लगभग 2,021 वर्ग मीटर क्षेत्र में पैदल यात्रियों के लिए कवर्ड पाथवे और लगभग 10,622 वर्ग मीटर क्षेत्र में कॉनकोर्स के ऊपर रूफिंग का कार्य प्रस्तावित है।
इन विकास कार्यों से स्टेशन परिसर का समग्र विकास होगा और यात्रियों को मौसम के अनुकूल सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवागमन की सुविधा मिलेगी।
वाराणसी की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता के अनुरूप होगा स्टेशन का विकास
काशी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास वाराणसी की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद स्टेशन की यात्री क्षमता, रेल परिचालन और आवागमन व्यवस्था में व्यापक सुधार होगा।
आधुनिक स्टेशन भवन, विशाल कॉनकोर्स, विस्तृत प्लेटफॉर्म, लिफ्ट, एस्केलेटर, बेहतर प्रतीक्षालय और पार्किंग जैसी सुविधाओं से यात्रियों को अधिक सुविधाजनक रेल यात्रा का अनुभव मिलेगा।
नमो गंगा रेल-सह-सड़क पुल का भी किया निरीक्षण
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वाराणसी में गंगा नदी पर निर्माणाधीन नमो गंगा रेल-सह-सड़क पुल यानी नमो ब्रिज के निर्माण कार्यस्थल का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों, तकनीकी व्यवस्थाओं और कार्य की प्रगति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
यह महत्वपूर्ण रेल-सह-सड़क पुल उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल के अंतर्गत बनाया जा रहा है। लगभग 1,074.6 मीटर लंबाई वाले इस पुल की स्वीकृत अनुमानित लागत 1,380.87 करोड़ रुपये है, जबकि निर्माण कार्य के लिए 1,201.37 करोड़ रुपये की लागत से अनुबंध आवंटित किया गया है।
परियोजना के तहत कुल 10 स्पैन का निर्माण किया जाना है। इनमें 108.5 मीटर के 8 स्पैन और 103.3 मीटर के 2 स्पैन शामिल हैं। पुल की आधारभूत संरचना में 9 पियर और 2 एबटमेंट सहित कुल 11 सब-स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं। इसके लिए 60 मीटर तक की गहराई वाले डबल-डी वेल का निर्माण भी प्रस्तावित है।
पुल पर दो स्तरों में रेल और सड़क यातायात की व्यवस्था
नमो गंगा रेल-सह-सड़क पुल की प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें रेल और सड़क यातायात के लिए दो अलग-अलग स्तर बनाए जा रहे हैं।
पुल के निचले तल पर रेल परिचालन के लिए कुल चार रेल लाइनें विकसित की जा रही हैं। इनमें दो अप और दो डाउन लाइनें शामिल हैं। इन लाइनों पर 2×25 केवी ओवरहेड इलेक्ट्रिक उपकरण यानी ओएचई प्रणाली स्थापित की जाएगी।
वहीं, पुल के ऊपरी तल पर छह लेन के राष्ट्रीय राजमार्ग के अनुरूप सड़क मार्ग विकसित किया जा रहा है। इसमें विद्युत व्यवस्था, क्रैश बैरियर और अन्य आवश्यक सड़क सुरक्षा सुविधाएं शामिल होंगी।
निरीक्षण के दौरान रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने रेल मंत्री को स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों की प्रगति और प्रस्तावित यात्री सुविधाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।
काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और नमो गंगा रेल-सह-सड़क पुल का निर्माण वाराणसी में रेल और सड़क परिवहन की सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजनाएं हैं। वहीं, दिल्ली से गुवाहाटी तक प्रस्तावित उत्तरी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के संबंध में रेल मंत्री की घोषणा ने उत्तर प्रदेश सहित कई शहरों के बीच तेज रेल यात्रा की संभावनाओं को सामने रखा है।