भारतीय रेलवे ने माल परिवहन क्षेत्र में अपनी क्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के पूर्ण संचालन, गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (GCT) नीति, वैगन निवेश योजनाओं और बेहतर फर्स्ट एवं लास्ट माइल कनेक्टिविटी के चलते रेलवे की माल ढुलाई लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रेलवे की माल लोडिंग बढ़कर 1,670 मिलियन टन (MT) पहुंच गई है।

रेल मंत्रालय ने माल ढुलाई को अधिक प्रभावी बनाने, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत करने और रेलवे की माल परिवहन हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल लागू की हैं। इसके तहत आधुनिक रेल फ्रेट टर्मिनल विकसित करने और रेलवे के स्वामित्व वाले गुड्स शेड के बुनियादी ढांचे को उन्नत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

निजी निवेश के माध्यम से कार्गो टर्मिनल स्थापित करने के लिए ‘गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (GCT)’ नीति शुरू की गई है। इन टर्मिनलों का स्थान उद्योगों की मांग, माल यातायात की संभावनाओं, रेलवे बुनियादी ढांचे की उपलब्धता और क्षेत्र की लॉजिस्टिक क्षमता के आधार पर तय किया जाता है।

अब तक 142 गति शक्ति कार्गो टर्मिनल शुरू किए जा चुके हैं, जिनकी अनुमानित माल प्रबंधन क्षमता 224 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है। इन GCT के माध्यम से लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश जुटाया गया है। वर्ष 2025-26 के दौरान इन टर्मिनलों से 146 MT माल का परिवहन किया गया।

भारतीय रेलवे ने निजी क्षेत्र को वैगनों में निवेश के लिए भी कई योजनाएं लागू की हैं। इनमें सीमेंट, तेल, स्टील, फ्लाई ऐश जैसी वस्तुओं के लिए विशेष वैगन शामिल हैं। अब तक लगभग 275 विशेष उद्देश्य वाले वैगन रेक और 397 सामान्य उद्देश्य वाले वैगन रेक परिचालन में हैं। इनसे बल्क सीमेंट, फ्लाई ऐश, स्टील उत्पाद, लौह अयस्क और कोयला जैसी वस्तुओं के परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा ऑटोमोबाइल परिवहन के लिए अलग योजना के तहत उद्योगों के स्वामित्व वाले लगभग 54 रेक भी संचालित किए जा रहे हैं।

रेलवे ने ग्राहकों की विशेष जरूरतों को पूरा करने के लिए ज्वाइंट पार्सल प्रोडक्ट-रैपिड कार्गो सर्विस (JPP-RCS) योजना भी लागू की है। इस योजना के तहत ग्राहकों को डोर-टू-डोर पार्सल सेवा उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए ‘वर्चुअल एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म (VAP)’ पर एग्रीगेटर्स (इंडिया पोस्ट के अतिरिक्त) के माध्यम से ऑनलाइन पार्सल स्पेस बुकिंग की सुविधा भी दी गई है।

रेल मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक उपक्रम CONCOR भी JPP-RCS का उपयोग करते हुए दिल्ली-कोलकाता और मुंबई-कोलकाता सेक्टर में डोर-टू-डोर पार्सल सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा सोनिक गुड्स शेड में पायलट प्रोजेक्ट के तहत डोर-टू-डोर लॉजिस्टिक्स सेवा भी संचालित की जा रही है।

रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए पिछले 12 वर्षों में बड़े स्तर पर नई रेल लाइनों के निर्माण और विस्तार का कार्य किया गया है। वर्ष 2009-14 के दौरान 7,599 किलोमीटर नई रेल लाइन शुरू की गई थी, जिसकी औसत गति 4.2 किलोमीटर प्रतिदिन थी। वहीं वर्ष 2014-26 के दौरान 36,429 किलोमीटर नई ट्रैक लाइन चालू की गई, जिसकी औसत गति 8.32 किलोमीटर प्रतिदिन रही, जो लगभग दोगुनी है।

1 अप्रैल 2026 तक भारतीय रेलवे में कुल 40,000 किलोमीटर लंबाई वाली 514 रेलवे बुनियादी ढांचा परियोजनाएं स्वीकृत हैं। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत लगभग 8.31 लाख करोड़ रुपये है। इनमें 169 नई लाइन परियोजनाएं, 29 गेज परिवर्तन परियोजनाएं और 316 दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं।

नई लाइन परियोजनाओं की कुल संख्या 169 है, जिनकी लंबाई 16,634 किलोमीटर है। इनमें मार्च 2026 तक 3,361 किलोमीटर कार्य पूरा हो चुका है और 1,57,572 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। गेज परिवर्तन की 29 परियोजनाओं की कुल लंबाई 3,987 किलोमीटर है, जिसमें 3,045 किलोमीटर पूरा हो चुका है और 24,227 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। वहीं 316 दोहरीकरण परियोजनाओं की कुल लंबाई 19,379 किलोमीटर है, जिनमें 6,177 किलोमीटर मार्च 2026 तक पूरा हो चुका है और 1,23,454 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

माल परिवहन को गति देने के लिए रेलवे ने दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजनाएं शुरू की थीं। इनमें लुधियाना से सोननगर तक 1,337 किलोमीटर लंबा ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) और दादरी से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (JNPT) तक 1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) शामिल हैं। दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पूरी तरह चालू हो चुके हैं।

DFC पर प्रतिदिन औसतन लगभग 443 मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं। इन कॉरिडोर ने अधिक औसत गति, तेज टर्नअराउंड समय और बेहतर विश्वसनीयता के साथ मजबूत परिचालन प्रदर्शन दिखाया है। DFC के कारण मालगाड़ियों को EDFC और WDFC की ओर स्थानांतरित किया गया, जिससे पारंपरिक रेल नेटवर्क पर अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हुई और रेलवे को अतिरिक्त माल एवं यात्री सेवाएं चलाने में मदद मिली।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना से डबल स्टैक कंटेनर (DSC) ट्रेनों, अधिक एक्सल लोड वाली ट्रेनों के संचालन, उत्तरी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों की पश्चिमी बंदरगाहों तक तेज पहुंच और DFC के किनारे नए टर्मिनल एवं उद्योग कनेक्टिविटी विकसित करने में सहायता मिलेगी।

केंद्रीय बजट 2026 में पूर्व में डंकुनी से पश्चिम में सूरत तक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की गई है। इस कॉरिडोर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और अपडेट करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।

रेलवे की इन पहलों का असर माल लोडिंग और राजस्व वृद्धि में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वर्ष 2014-15 में भारतीय रेलवे की माल लोडिंग 1,098 मिलियन टन थी, जो वर्ष 2015-16 में 1,104 MT, 2016-17 में 1,109 MT, 2017-18 में 1,162 MT, 2018-19 में 1,223 MT, 2019-20 में 1,210 MT, 2020-21 में 1,233 MT, 2021-22 में 1,418 MT, 2022-23 में 1,512 MT, 2023-24 में 1,591 MT और 2024-25 में 1,617 MT रही।

वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,670 MT हो गया है। इसके साथ ही भारतीय रेलवे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी माल ढुलाई करने वाली रेलवे बन गई है। यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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