मिसाइल और सैन्य उपकरण प्रदर्शित हैं जिन्हें भारतीय सेना द्वारा यूके से रक्षा खरीद के संदर्भ में देखा जा रहा है।

भारतीय रक्षा तंत्र और आधुनिक युद्धक रणनीतियों के लिहाज से एक बेहद अहम और बड़ा कदम उठाते हुए, भारतीय सेना अपनी हवाई सुरक्षा और ड्रोन-रोधी क्षमताओं को अभेद्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। समकालीन युद्धक्षेत्रों में ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और उसके खतरों से निपटने के लिए, भारतीय सेना यूनाइटेड किंगडम (UK) से अत्याधुनिक 'मार्टलेट' यानी लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल (Lightweight Multirole Missile) की खरीद को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की तैयारी में जुटी हुई है। यूनाइटेड किंगडम के बेलफास्ट शहर में स्थित प्रसिद्ध रक्षा निर्माता 'थेल्स एयर डिफेंस' द्वारा निर्मित इस उन्नत हथियार को लेकर दोनों देशों की सरकारों के बीच जल्द ही इस महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की पूरी उम्मीद है। इस रक्षा सौदे के मुकम्मल होते ही भारत, यूक्रेन के बाद वैश्विक स्तर पर इस विशेष मिसाइल का उपयोग करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन जाएगा।

आधुनिक सैन्य साजो-सामान के जानकारों के अनुसार, यह मिसाइल अपनी बेजोड़ तकनीकी खूबियों के कारण बेहद खास मानी जाती है। मार्टलेट लगभग 13 किलोग्राम वजन वाली एक बेहद हल्की, सटीक निशाना लगाने वाली और बहुउद्देशीय मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 6 किलोमीटर से अधिक है। यह अत्याधुनिक मिसाइल मैक 1.5 यानी ध्वनि की गति से भी तेज रफ्तार के साथ दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने में पूरी तरह सक्षम है। शुरुआती दौर में ब्रिटेन के साथ लगभग 350 मिलियन पाउंड यानी करीब 468 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रक्षा सौदा प्रस्तावित किया गया था, जिसे अब संशोधित करके कई सौ अतिरिक्त मिसाइलों की खरीद के रूप में विस्तारित किया जा रहा है। इस हथियार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल हवा में उड़ने वाले खतरों को ही नहीं, बल्कि जमीन पर मौजूद बख्तरबंद वाहनों और समुद्र के भीतर दुश्मन की तेज रफ्तार हमलावर नौकाओं को भी पलक झपकते ही पूरी तरह तबाह और ध्वस्त कर सकती है।

इस प्रकार की उन्नत रक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर गौर करें तो वर्तमान समय में आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप ने अर्थशास्त्र के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। आज के दौर में लाखों और करोड़ों डॉलर की महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल करके मात्र कुछ हजार रुपये की लागत वाले सस्ते अटैक ड्रोन को आसमान में मार गिराना आर्थिक रूप से भारतीय सेना या किसी भी देश के लिए भारी घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इसके विपरीत, लगभग 50,000 पाउंड यानी भारतीय मुद्रा में करीब पचास से पचपन लाख रुपये प्रति यूनिट की अनुमानित कीमत वाली मार्टलेट मिसाइल सेना को एक बेहद किफायती, कम लागत वाला और अत्यधिक कारगर विकल्प प्रदान करती है। यह रक्षा सौदा भारतीय थल सेना और अन्य अंगों को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के, दुश्मन देशों के सस्ते ड्रोन, क्वाडकॉप्टर और हमलावर हेलीकॉप्टरों को आसानी से और प्रभावी ढंग से नष्ट करने की अजेय शक्ति प्रदान करेगा।

इसकी सामरिक तैनाती और ऑपरेशनल योजनाओं पर नजर डालें तो ब्रिटिश नौसेना पहले ही बंगाल की खाड़ी और लाल सागर जैसे सामरिक रूप से संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में अपने युद्धपोतों की सुरक्षा के लिए मार्टलेट का सफल परीक्षण और सफल ऑपरेशनल इस्तेमाल कर चुकी है। इस बड़े रक्षा सौदे के पूर्ण रूप से अंतिम चरण में पहुंचते ही, भारतीय सेना इन मारक मिसाइलों को देश के विशाल मैदानी इलाकों से लेकर हिमालय की अत्यधिक ऊंचाई वाले दुर्गम और कठिन सीमावर्ती पर्वतीय क्षेत्रों तक में तैनात करने की व्यापक योजना बना रही है। मार्टलेट मिसाइल का बेहद हल्का वजन और इसका पोर्टेबल एवं सुगम डिजाइन भारतीय सैनिकों के लिए इन कठिन और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में इसे आसानी से अपने साथ ले जाने और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत तैनात करने में बेहद मददगार साबित होगा। यह रणनीतिक कदम आने वाले समय में भारतीय थल सेना की हवाई सुरक्षा और काउंटर-ड्रोन रणनीति को एक नया आयाम और मजबूती प्रदान करेगा।