धुरंधर: तिग्मांशु धूलिया ने आदित्य धर की फिल्म की कहानी पर उठाए सवाल
द वायर के एक कार्यक्रम में तिग्मांशु धूलिया ने हिंदी सिनेमा में मौलिक कहानियों की कमी और चरम पूंजीवाद के असर पर अपनी बात रखी।
तस्वीर में बाएं तिग्मांशु धूलिया और दाएं रणवीर सिंह नजर आ रहे हैं।
रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी भले ही बॉलीवुड की सबसे बड़ी फिल्म फ्रेंचाइजी में से एक बनकर उभरी हो, लेकिन फिल्ममेकर तिग्मांशु धूलिया इसकी सफलता को लेकर अलग राय रखते हैं। एक हालिया कार्यक्रम में उन्होंने फिल्म की कहानी पर सवाल उठाते हुए साफ कहा कि ‘धुरंधर’ में कोई कहानी नहीं है। उन्होंने फिल्म को आधार बनाकर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में मौलिक कहानी कहने की कमी पर भी अपनी बात रखी।
‘द वायर’ द्वारा आयोजित ‘द स्टेट ऑफ मीडिया एंड फिल्म इंडस्ट्री’ कार्यक्रम में बोलते हुए तिग्मांशु ने आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म के कथानक की आलोचना की। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी को व्यापक एक्शन आधारित प्लॉट से आगे परिभाषित करना मुश्किल है। तिग्मांशु ने कहा, “अगर कोई आपसे धुरंधर की कहानी पूछे तो आप बता नहीं सकते। एक आदमी पाकिस्तान जाता है और वहां तबाही मचा देता है। क्या ये कहानी है? फिल्मों में कहानियां खत्म हो गई हैं। और जो कहानियां सुनाते हैं, वे भी खत्म हो गए हैं और जो कहानी बताना चाहते हैं, उन्हें भी ऐसा करने की इजाजत नहीं है। उन्हें लगता है कि उनकी फिल्में नहीं चलेंगी। वे उसी पैटर्न को फॉलो करते हैं।”
इसके बाद तिग्मांशु ने अपनी आलोचना को फिल्मों से आगे बढ़ाते हुए इसे उनके मुताबिक चरम पूंजीवाद के प्रभाव से जोड़ा। उन्होंने कहा कि इसका असर सिनेमा के साथ-साथ समाज में व्यक्तित्व और मौलिकता की कमी के रूप में भी दिखाई देता है। उनके मुताबिक सफल फॉर्मूलों को दोहराने की प्रवृत्ति सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि फैशन से लेकर शहरों के डिजाइन तक में नजर आती है।
तिग्मांशु ने कहा, “ऐसा चरम पूंजीवाद के दौरान होता है, लोग भी एक-दूसरे जैसे दिखने लगते हैं। आप आजकल का फैशन देखते हैं, हर कोई एक जैसा दिखता है। सबका हेयरकट एक जैसा है। यहां तक कि शहर भी एक-दूसरे जैसे दिखने लगे हैं। हर शहर का अनोखा चरित्र खत्म हो गया है। मेरा शहर इलाहाबाद, (जिसका नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया गया है) कई अलग-अलग चीजों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह किसी भी दूसरे शहर जैसा दिखता है, वही मॉल, वही कारें। इस तरह की राजनीतिक व्यवस्था आपकी व्यक्तिगत पहचान खत्म कर देती है।”
हालांकि, सोशल मीडिया यूजर्स को तिग्मांशु की यह टिप्पणी रास नहीं आई। एक्स पर कई लोगों ने फिल्ममेकर की आलोचना की। एक यूजर ने लिखा, “एक और कड़वा, खुद को स्वाद का व्यापारी समझने वाला व्यक्ति अपने कोकून से बाहर आ गया है।” एक अन्य यूजर ने पोस्ट किया, “अगर चरम जलन का कोई चेहरा होता।” वहीं तीसरे यूजर ने केवल लिखा, “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे।”
‘धुरंधर’ के लेखक और निर्देशक आदित्य धर हैं। फिल्म में रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल, आर माधवन, सारा अर्जुन, राकेश बेदी, गौरव गेरा और डेनिश पांडोर के साथ कई सहायक कलाकार भी शामिल हैं। तिग्मांशु धूलिया की टिप्पणी ने फिल्म की कहानी और हिंदी सिनेमा में मौलिक कहानी कहने को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।