‘सूखे का शैतान’ बनाम विजय देवरकोंडा का विद्रोही रूप, ‘रणबाली’ के टीजर ने बढ़ाई फिल्म की धड़कन|
विजय देवरकोंडा की फिल्म 'रणबाली' का टीजर रिलीज, 1876-1878 के अकाल और औपनिवेशिक संघर्ष की कहानी
फिल्म 'रणबाली' के टीजर में दिखाए गए दृश्य में ब्रिटिश काल के दौरान सूखे और भूख से बेहाल लोगों का मार्मिक चित्रण किया गया है|
'रणबाली' के मेकर्स ने विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की पीरियड एक्शन ड्रामा फिल्म 'रणबाली' का 2 मिनट 32 सेकंड का पहला टीजर रिलीज कर दिया है, जो 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। यह टीजर दर्शकों को फिल्म की बेरहम और ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित दुनिया की एक गहरी और दर्दनाक झलक दिखाता है। विजय देवरकोंडा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर टीजर शेयर करते हुए लिखा, 'कभी मत भूलना। वे लोग जो मेहमान बनकर आए और जालिम बनकर रह गए। हमारे गांवों के वे लोग, जिन्होंने खून-खराबा करने का फैसला किया।'
इस टीजर की शुरुआत एक गंभीर टाइटल कार्ड से होती है, जिस पर लिखा है, 'ब्रिटिश शासन के दौरान 1876-78 में जान गंवाने वाले अस्सी लाख भारतीयों की याद में।' यह सीधा इशारा 1876-78 के उस भयानक अकाल की ओर है, जिसने मद्रास प्रेसीडेंसी को पूरी तरह तबाह कर दिया था और दक्षिण व पश्चिमी भारत में लाखों लोगों की जान ले ली थी। विजुअल्स में दुख, लाचारी और भीषण शोषण की तस्वीर दिखाई गई है, जिसमें सूखे से जूझते वीरान गांव और भूख से बेहाल आम लोग नजर आते हैं।
कहानी में मुख्य खलनायक के रूप में साउथ अफ्रीकी एक्टर अर्नोल्ड वोस्लू को पेश किया गया है, जो 'द ममी' फ्रेंचाइजी में इमहोतेप का किरदार निभाने के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। इस फिल्म में वह सर थियोडोर हेक्टर के रोल में हैं, जिन्हें 'सूखे का शैतान' कहा गया है। वह एक ऐसा बेरहम ब्रिटिश अफसर है जो भारत की दौलत को बेदर्दी से लूटता है और अपने नियंत्रण वाले स्थानीय लोगों पर जरा भी दया नहीं दिखाता है।
इसके बाद स्क्रीन पर विजय देवरकोंडा की एंट्री सिंगनामला बोब्बिली रानाबाली के रूप में होती है, जिससे टीजर का पूरा माहौल बदल जाता है। उनका यह रफ, आक्रामक और लड़ाई-झगड़े वाला लुक उनके पिछले शहरी और रोमांटिक किरदारों से एकदम अलग है। उन्हें एक ऐसे खूंखार और दिलेर व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है जो ब्रिटिश सेना के अत्याचारों के खिलाफ अकेले सीना तानकर खड़ा हो जाता है। टीजर के एक बेहद अहम मोड़ पर विजय का यह दमदार डायलॉग गूंजता है- 'इस जमीन का एक दाना भी बाहर एक्सपोर्ट नहीं किया जाएगा।' टीजर के अंत में एक खौफनाक राक्षस जैसा हाथ दिखाई देता है जो सस्पेंस पैदा करता है।
यह फिल्म ब्रिटिश शासन के दौरान 19वीं सदी के रायलसीमा क्षेत्र (विशेषकर 1854 से 1878 के बीच) की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह विद्रोह, सूखे और औपनिवेशिक इतिहास के उन अनकहे पन्नों से जुड़ी सच्ची घटनाओं से प्रेरित है, जिन्हें इतिहास के पन्नों में काफी हद तक भुला दिया गया है। फिल्म की पटकथा और कहानी प्रमोद तमिनेनी ने लिखी है, जबकि इसका निर्देशन राहुल सांकृतियन ने किया है, जिन्होंने इससे पहले विजय की 'टैक्सीवाला' और नानी की 'श्याम सिंघा रॉय' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया था।
फिल्म का संगीत अजय-अतुल ने तैयार किया है, सिनेमैटोग्राफी नीरव शाह की है और एडिटिंग कार्तिक श्रीनिवास आर. ने संभाली है। मैथ्री मूवी मेकर्स के बैनर तले इसे नवीन यरनेनी और वाई. रवि शंकर ने प्रोड्यूस किया है, जबकि टी-सीरीज इसे बड़े पैमाने पर पेश कर रही है। यह फिल्म आगामी 16 अक्टूबर को तेलुगू, तमिल, हिंदी, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में एक साथ सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यह दशहरा की छुट्टियों का समय होगा, जब बॉक्स ऑफिस पर रजनीकांत की 'जेलर 2' और धनुष की 'ओम' जैसी बड़ी फिल्मों से इसका सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा।