तस्वीर में चित्तौड़गढ़ की सड़क पर विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पारंपरिक हथियारों और झंडों के साथ शोभायात्रा में शामिल समाज के लोग और युवा नजर आ रहे हैं।

चित्तौड़गढ़ में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 1994 में घोषित विश्व आदिवासी दिवस राणा पूंजा भील समाज विकास संस्थान की ओर से धूमधाम और समारोहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर राणा पूंजा भील समाज विकास समिति द्वारा शहर में इंदिरा गांधी स्टेडियम से विशाल शोभायात्रा निकाली गई।

शोभायात्रा इंदिरा गांधी स्टेडियम से रवाना होकर कलेक्ट्रेट चौराहा, महाराणा प्रताप सेतु पुलिया और सुभाष चौक होते हुए गांधी नगर स्थित राणा पूंजा भवन पहुंची, जहां इसका समापन हुआ। शोभायात्रा में आदिवासी वाद्य यंत्रों के साथ मांदल-थाली, ढोल-थाली और मसकबाजा बजाते हुए समाजजन शामिल हुए।

शोभायात्रा में समाज के सैकड़ों युवा पारंपरिक वाद्य यंत्रों और ढोल की थाप पर नृत्य करते हुए चल रहे थे। युवाओं के हाथों में तीर-कमान, भाला और तलवार जैसे पारंपरिक हथियार भी नजर आए। पूरे मार्ग में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और नृत्य ने शोभायात्रा को विशेष स्वरूप दिया।

शहर में निकाली गई शोभायात्रा के दौरान पुलिस के आला अधिकारियों सहित पर्याप्त मात्रा में जाप्ता तैनात रहा। शोभायात्रा के कलेक्ट्रेट चौराहे पर पहुंचने पर समाज के लोगों ने जमकर पारंपरिक नृत्य किया।

इस तरह विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर चित्तौड़गढ़ में राणा पूंजा भील समाज की ओर से आयोजित शोभायात्रा में समाज के लोगों ने पारंपरिक संस्कृति, वाद्य यंत्रों और नृत्य के माध्यम से अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

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