तस्वीर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के युवा गोष्ठी कार्यक्रम के दौरान मंच से संबोधित करते हुए वक्ता और मंच पर बैठे अन्य अतिथि नजर आ रहे हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को निम्बाहेड़ा मुख्यालय पर युवा आधारित कार्यक्रम आयोजित किया गया। ओमवती सभागार, बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, निम्बाहेड़ा में आयोजित कार्यक्रम में युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संगठन मंत्री व क्रीड़ा भारती प्रसाद महानकर ने कहा कि भारत अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों के आधार पर पुनः अखंड राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।

प्रसाद महानकर ने युवाओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए संघ की राष्ट्र एवं समाज के प्रति गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संघ की शाखा व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की यात्रा का आधार है। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन, प्रबुद्धजन गोष्ठी और घर-घर संपर्क अभियान सहित विभिन्न कार्यक्रमों का उल्लेख किया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज को जागृत करना है।

महानकर ने कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, ‘स्व’ का भाव, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन को पंच परिवर्तन के प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि इन माध्यमों से समाज को सकारात्मक दिशा दी जा रही है।



 





उन्होंने स्पष्ट किया कि शताब्दी वर्ष के अंतिम चरण में युवा आधारित कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य युवाओं की स्वयं, परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति सोच को सकारात्मक बनाना है। इन कार्यक्रमों का लक्ष्य युवाओं में सेवा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना है, ताकि ‘इदं न मम, इदं राष्ट्रीय स्वाहा’ यानी ‘यह मेरा नहीं, जो कुछ भी है राष्ट्र का है’ का भाव उनके जीवन का आधार बन सके।

इसी क्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निम्बाहेड़ा जिले में युवा आधारित कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत सह जिला कार्यवाह भूरा लाल ने खंड में आयोजित युवा गोष्ठी को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि समाज में ‘स्व’ का भाव जागृत कर छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से भी देश को विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। युवा आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से संघ की ओर से युवाओं में स्वयं, परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने पर जोर दिया गया।

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