लैंड सीडिंग नहीं होने से किसान परेशान, बस्सी तहसील में महीनों से लगा रहे चक्कर
बस्सी तहसील में लैंड सीडिंग नहीं होने से किसान महीनों से चक्कर लगा रहे हैं। खाता और दस्तावेज अपडेट का काम भी अटका, तहसीलदार ने समाधान का भरोसा दिया।
तस्वीर में बस्सी, चित्तौड़गढ़ स्थित तहसीलदार एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट कार्यालय की इमारत नजर आ रही है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रत्येक किसान को सालाना 6 हजार रुपये की सहायता दी जाती है। सरकार किसानों को योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन चितौड़गढ़ जिले के बस्सी कस्बे में लैंड सीडिंग नहीं होने से किसान तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि तहसील में उनकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है।
जानकारी के अनुसार, बस्सी तहसील कार्यालय में रोजाना एक दर्जन से अधिक किसान लैंड सीडिंग करवाने पहुंच रहे हैं। इसके अलावा किसान खाता नंबर सही करवाने और जरूरी दस्तावेज अपडेट करवाने के लिए भी कार्यालय आ रहे हैं, लेकिन उनका काम नहीं हो पा रहा है। लैंड सीडिंग करवाने के लिए एक व्यक्ति महीनों से तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहा है।
किसानों के अनुसार, तहसील में कंप्यूटर पर काम करने वाले सूचना सहायक कर्मचारी भी उनका काम नहीं कर पा रहे हैं। बार-बार कहने पर किसानों को जवाब दिया जाता है, "हम क्या करें, आगे से हो जाएगा।" अधिक परेशानी होने पर चितौड़गढ़ जाने या तहसीलदार साहब को बताने की बात कही जाती है। इस तरह के जवाब से किसान और अधिक परेशान हैं।
किसानों ने बताया कि लैंड सीडिंग का काम सूचना सहायक कर्मचारी को समझ में नहीं आ रहा है और वह अलग-अलग तहसील कार्यालयों से पूछकर काम करता है। लैंड सीडिंग नहीं होने के कारण किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाले 6 हजार रुपये के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है।
इस संबंध में बस्सी तहसीलदार मुकेश गुर्जर ने कहा कि अभी चुनाव में ड्यूटी है। चार-पांच दिनों बाद स्वयं इस मामले को देखूंगा और किसानों का काम किया जाएगा।
लैंड सीडिंग की समस्या के कारण किसान योजना का लाभ लेने के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। तहसीलदार के अनुसार, चार-पांच दिनों बाद मामले को देखकर किसानों का काम किया जाएगा।