बड़ी सादड़ी। निकुंभ कस्बे के समता भवन में आयोजित चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला में शासन दीपक निश्चल मुनि मसा आदि ठाणा 2 ने श्रावकों को अंतर्मन में झांकने और मानवीय गुणों को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कभी-कभी अपना चेहरा अंतर्मन के दर्पण में देखें, आपको ईश्वर की झलक मिल जाएगी।

समता भवन में प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से 10 बजे तक आयोजित प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि मानव प्रतिदिन दर्पण में अपना चेहरा देखता है, उसे सजाता और संवारता है, लेकिन ईश्वर को देखने और समझने का प्रयास नहीं करता। उन्होंने कहा कि इस दुनिया में मानव सभी दिखाई देते हैं, लेकिन प्रेम, करुणा, दया, अहिंसा तथा अपनत्व के रंग में रंगा हुआ मानवीय गुणों से युक्त वास्तविक मानव दिखाई नहीं देता है।

मुनि श्री ने भगवान महावीर के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि हमेशा अपने से कमजोर व्यक्ति के प्रति इंसानियत के साथ सद् व्यवहार करते हुए उसे अपना मानकर ऊंचा उठाने की भावना ही सही मायने में भक्ति का सन्मार्ग है।

उन्होंने कहा कि लोग आजकल वफादारी को भूल गए हैं, जबकि वफादारी आज भी पालतू पशुओं में अपने मालिक के प्रति दिखाई देती है। हमें मानव होते हुए भी वफादार पशुओं से सीख लेनी चाहिए। वफादारी और ईमानदारी जैसे गुणों को अपनाने से मानव मात्र का कल्याण संभव है।

मुनि श्री ने कहा कि सत्य की खोज हमेशा अपने मन से प्रारंभ करनी चाहिए। ईश्वर का निवास हमेशा मानव हृदय में रहता है।

इस अवसर पर संघ के मंत्री सुरेश कुमार सहलोत ने बाहर गांव से आने वाले श्रावकों का अभिनंदन किया। सनातन श्रावक प्रेम सिंह सिसोदिया ने बताया कि मुनिश्री से सप्ताह में एक दिन विद्यालय में अध्ययनरत बालक-बालिकाओं में संस्कार जागृति के लिए संस्कार बोध कराने का विनयपूर्वक आग्रह किया गया है। प्रवचन में मानव जीवन में प्रेम, करुणा, दया, अहिंसा, अपनत्व, वफादारी और ईमानदारी जैसे गुणों के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।

Tags: