बड़ी सादड़ी क्षेत्र में कथित औद्योगिक कचरे से प्रभावित क्षेत्रों का मामला अब राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गया है। जहर मुक्त बड़ीसादड़ी संघर्ष समिति की ओर से इस संबंध में जनहित याचिका दायर की गई है। समिति के संयोजक रणजीत सिंह झाला, सहसंयोजक प्रभु प्रजापति तथा टीम के सदस्य विनोद रांका, निहाल आमेटा, वैभव मोगरा सहित पूरी टीम ने मामले को न्यायालय के समक्ष उठाया है।

इससे पहले समिति की ओर से बड़ी सादड़ी में औद्योगिक कचरे के विरोध में लगातार 56 दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया गया था। लंबे आंदोलन के बाद अब यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट में पहुंचा है।

हाईकोर्ट में प्रस्तुत मामले में बड़ी सादड़ी तहसील के आसपास कथित रूप से डाले गए औद्योगिक कचरे और उससे प्रभावित भूमि का मुद्दा उठाया गया है। न्यायालय ने मामले में नोटिस जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

न्यायालय के आदेश के अनुसार तहसीलदार एवं संबंधित अधिकारी विवादित भूमि से मिट्टी के नमूने एकत्र कर उनकी जांच करवाएंगे। इन नमूनों की जांच राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल से करवाकर रिपोर्ट अगली सुनवाई पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जानी है। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

समिति का कहना है कि बड़ी सादड़ी क्षेत्र में औद्योगिक कचरे को लेकर शुरू किया गया 56 दिवसीय आंदोलन अब न्यायालय की निगरानी में आगे बढ़ रहा है। समिति के सदस्यों ने कहा कि उनका उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सामने लाना और पर्यावरण एवं आमजन के हितों की रक्षा सुनिश्चित करवाना है।

संघर्ष समिति ने कहा कि 56 दिनों के धरने के बाद अब न्याय की लड़ाई अदालत के माध्यम से जारी रहेगी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद विवादित भूमि से मिट्टी के नमूनों की जांच और उसकी रिपोर्ट आगामी सुनवाई में प्रस्तुत किए जाने से मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निगाहें टिकी हैं।

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