निम्बाहेड़ा में 800 फीट लंबे जिनशासन ध्वज के साथ निकली भव्य शासन ध्वज यात्रा
निम्बाहेड़ा में 800 फीट लंबे जिनशासन ध्वज के साथ भव्य यात्रा निकली। 315 सामूहिक आयम्बिल में 6 से 95 वर्ष तक के श्रद्धालु शामिल हुए।
तस्वीर में निम्बाहेड़ा में आयोजित भव्य शासन ध्वज यात्रा के दौरान महिलाएं सड़क पर लंबी ध्वजा थामकर चलती दिखाई दे रही हैं।
निम्बाहेड़ा में वर्धमान तपोत्सव चातुर्मास समिति के तत्वावधान में परम पूज्य प्रन्यास प्रवर श्री राजरत्न विजय जी महाराज साहब की 99वीं ओलीजी की पूर्णता के पावन निमित्त आयोजित त्रिदिवसीय धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला में भव्य शासन ध्वज यात्रा श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुई। यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
शासन ध्वज यात्रा का शुभारंभ श्री राजेन्द्र सूरी ज्ञान मंदिर से हुआ। यात्रा का प्रमुख आकर्षण 800 फीट लंबा विशाल जिनशासन ध्वज रहा। श्रद्धालुओं ने इस विशाल ध्वज को पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ थामकर नगर के प्रमुख मार्गों से यात्रा निकाली। विशाल ध्वज के साथ आगे बढ़ती धर्मप्रेमियों की कतार ने वातावरण को जिनशासन की भक्ति और गौरव से भर दिया।
यात्रा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं के साथ धर्मप्रेमी नागरिकों ने भी सहभागिता की। श्रद्धालुओं में जिनशासन के प्रति श्रद्धा और उत्साह दिखाई दिया। शासन ध्वज यात्रा के माध्यम से नगरवासियों को जिनशासन की आन-बान-शान और शासन ध्वज के सम्मान का संदेश दिया गया।
इस त्रिदिवसीय धार्मिक आयोजन के मुख्य लाभार्थी स्व. श्री राजमलजी छाजेड़ एवं सुश्री कुहू की स्मृति में श्रीमती सोहनबाई, सौभाग्यमल-विजयलक्ष्मी, सुरेन्द्र-मोनिका, महावीर-ज्योति, हर्ष-प्रेरणा, नितांत, गौरव, पहल, जिनय, धार्विक एवं समस्त छाजेड़ परिवार (चिकारड़ा वाले) रहे।
छाजेड़ परिवार द्वारा आयोजित इस पावन आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागी बनकर धार्मिक आराधना और तप की अनुमोदना की। परिवार की ओर से सभी तपस्वियों को प्रभावना स्वरूप विशेष सिक्का भेंट किया गया। साथ ही उपस्थित श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमीजन का आत्मीय अभिवादन किया गया।
इसी पावन अवसर पर सकल जैन श्री संघ, निम्बाहेड़ा की ओर से श्री राजेन्द्र सूरी ज्ञान मंदिर में सामूहिक आयम्बिल का आयोजन किया गया। आयोजन में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। एक ही पंडाल में 315 आयम्बिल सम्पन्न हुए, जिसने पिछले सभी सामूहिक आयम्बिल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया।
सामूहिक आयम्बिल की विशेष बात यह रही कि 6 वर्षीय लिवांश मोगरा ने पहली बार आयम्बिल की आराधना की, वहीं 95 वर्षीय श्री समरथमल सिंघवी ने भी आयम्बिल तप में सहभागिता की। विभिन्न आयु वर्ग के तपस्वियों ने अपनी तपस्या के माध्यम से प्रन्यास प्रवर श्री राजरत्न विजय जी महाराज साहब की 99वीं ओलीजी की भावपूर्ण अनुमोदना की।
बालक से लेकर वरिष्ठजनों तक की सहभागिता ने सामूहिक तप-आराधना के इस आयोजन को जैन समाज के लिए विशेष प्रेरणादायी बनाया। सभी ने तप और आराधना के माध्यम से धर्म के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
दिनभर के धार्मिक आयोजनों के बाद शाम को जैन धर्म के रहस्यों और आध्यात्मिक भावों पर आधारित विशेष महापूजा का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ महापूजा में सहभागिता की, जिससे आयोजन का आध्यात्मिक वातावरण और अधिक भक्तिमय बना।
रात्रि में गुजरात के नवसारी से पधारे सुप्रसिद्ध कलाकार प्रतीक भाई एवं वैभव भाई ने ‘एक शाम उपकारियों के नाम’ कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में माता-पिता के उपकार और उनके प्रति कृतज्ञता को संगीत, भाव और संवेदनाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर कर दिया।
शासन ध्वज यात्रा, 315 सामूहिक आयम्बिल, विशेष महापूजा तथा माता-पिता के प्रति कृतज्ञता पर आधारित संगीतमय कार्यक्रमों के माध्यम से निम्बाहेड़ा में धर्म, तप, संस्कार और सेवा का संगम देखने को मिला। वर्धमान तपोत्सव चातुर्मास समिति एवं छाजेड़ परिवार के संयोजन में सम्पन्न इन आयोजनों ने जिनशासन के प्रति श्रद्धा, तप के प्रति समर्पण और संस्कारों के प्रति कृतज्ञता का संदेश दिया।