कपासन में FFS प्रशिक्षण: डिजिटल बुकिंग से पारदर्शी उर्वरक वितरण पर जोर
कपासन में FFS प्रशिक्षण के दौरान 125 उर्वरक आदान विक्रेताओं को डिजिटल बुकिंग, QR कोड आधारित वितरण और उर्वरक नियंत्रण आदेश की जानकारी दी गई। नई व्यवस्था से पारदर्शी वितरण और किसान सुविधा पर जोर रहेगा।
तस्वीर में कपासन के आरएनटी कॉलेज कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित उर्वरक वितरण प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बैठे हुए आदान विक्रेता और संबोधित करते वक्ता नजर आ रहे हैं।
कपासन में उर्वरक वितरण व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने की दिशा में उर्वरक आदान विक्रेताओं को नई व्यवस्था की जानकारी दी गई। कार्यालय सहायक निदेशक कृषि विस्तार, कपासन के तत्वावधान में आरएनटी कॉलेज कॉन्फ्रेंस हॉल, कपासन में “Framework for Fertilizer Sale (FFS)” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में कृषि उपजिला कपासन के अधीनस्थ पंचायत समिति कपासन, भूपालसागर एवं गंगरार क्षेत्र के लगभग 125 उर्वरक आदान विक्रेताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ. शंकरलाल जाट, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार, जिला चित्तौड़गढ़ रहे। प्रशिक्षण में श्री हीरालाल सालवी, सहायक निदेशक कृषि विस्तार, कपासन, श्री प्रशांत कुमार जाटोलिया, कृषि अधिकारी (फसल), कपासन तथा इफको प्रतिनिधि एवं डिस्ट्रिक्ट एरिया मैनेजर श्री मुकेश आमेटा ने उर्वरक वितरण की नवीन व्यवस्था, विभागीय प्रावधानों और डिजिटल प्रणाली से संबंधित विस्तृत जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान Framework for Fertilizer Sale (FFS) की कार्यप्रणाली और उद्देश्य के साथ किसान पंजीकरण एवं ऑनलाइन बुकिंग, डीलर चयन, क्यूआर कोड आधारित उर्वरक वितरण तथा व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित उर्वरक आदान विक्रेताओं की व्यावहारिक समस्याओं और जिज्ञासाओं का विषय विशेषज्ञों ने समाधान किया।
श्री हीरालाल सालवी, सहायक निदेशक कृषि विस्तार, कपासन ने उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने लाइसेंसधारी उर्वरक आदान विक्रेताओं को अनुज्ञा पत्र में निर्धारित शर्तों, नियमों और विभागीय दिशा-निर्देशों की पूर्ण पालना करते हुए व्यवसाय संचालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्धारित दर पर उर्वरक विक्रय, स्टॉक एवं बिक्री अभिलेखों का नियमानुसार संधारण तथा किसानों को पारदर्शी एवं सुचारु रूप से उर्वरक उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया।
श्री प्रशांत कुमार जाटोलिया, कृषि अधिकारी (फसल), कपासन ने FFS (Framework for Fertilizer Sale) पद्धति की विस्तृत एवं व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने चरणबद्ध तरीके से बताया कि संबंधित एप किस प्रकार इंस्टॉल एवं संचालित किया जाएगा, किसान उर्वरक की ऑनलाइन बुकिंग किस प्रकार करेगा और बुकिंग के बाद प्राप्त क्यूआर कोड के आधार पर संबंधित उर्वरक आदान विक्रेता किसान को यूरिया किस प्रकार उपलब्ध कराएगा।
उन्होंने किसान की बुकिंग से लेकर क्यूआर कोड सत्यापन और उर्वरक वितरण तक की संपूर्ण FFS प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया तथा उपस्थित आदान विक्रेताओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
डॉ. शंकरलाल जाट, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार, जिला चित्तौड़गढ़ ने FFS के क्रियान्वयन पर विशेष चर्चा करते हुए बताया कि आगामी समय में उर्वरक वितरण व्यवस्था को तकनीक आधारित, अधिक पारदर्शी, सरल एवं किसान हितैषी बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नवीन व्यवस्था के अंतर्गत किसान ऑनलाइन बुकिंग एप के माध्यम से फार्मर आईडी एवं आधार नंबर के आधार पर उर्वरक की बुकिंग कर संबंधित डीलर का चयन कर सकेंगे। इसके बाद किसान उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 में विनिर्दिष्ट उर्वरकों को निर्धारित दर पर सुगमता से प्राप्त कर सकेगा।
डॉ. जाट ने बताया कि इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन से उर्वरकों की कालाबाजारी, अनावश्यक टैगिंग एवं वितरण संबंधी अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सहायता मिलेगी। साथ ही किसानों को उर्वरक प्राप्त करने के लिए लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलेगी तथा आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक समयबद्ध, पारदर्शी एवं सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध हो सकेगा।
इफको प्रतिनिधि एवं डिस्ट्रिक्ट एरिया मैनेजर श्री मुकेश आमेटा ने उर्वरकों की उपलब्धता, संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग तथा किसानों तक उचित माध्यम से उर्वरक पहुंचाने में अधिकृत आदान विक्रेताओं की भूमिका के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने विक्रेताओं से किसानों को सही उर्वरक, सही मात्रा और उचित समय पर उपलब्ध कराने में सक्रिय सहयोग की अपेक्षा की।
प्रशिक्षण में उपस्थित लगभग 125 उर्वरक आदान विक्रेताओं को नवीन डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप स्वयं को तैयार रखने, विभागीय दिशा-निर्देशों एवं उर्वरक नियंत्रण आदेश के प्रावधानों की पालना करने तथा उर्वरक वितरण में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं किसान सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।
उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में कार्यालय हाजा के कृषि अन्वेषक श्री अभिषेक कुमावत, सहायक कृषि अधिकारी श्री गोपाल चाष्टा तथा वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक श्री पारसमल रेगर भी उपस्थित रहे। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन एवं व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्री बालूराम शर्मा, सहायक कृषि अधिकारी, कपासन ने मुख्य अतिथि, कृषि विशेषज्ञों, आगंतुकों एवं उपस्थित उर्वरक आदान विक्रेताओं का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया।
प्रशिक्षण का मुख्य संदेश रहा— “डिजिटल बुकिंग, पारदर्शी वितरण, समय पर उर्वरक और किसान को सहज सुविधा।”