चित्तौड़गढ़ में राष्ट्रीय लोक अदालत: 96 हजार से अधिक प्रकरण निस्तारित
लोक अदालत की 15 बेंचों ने आपसी सहमति से मामलों का निस्तारण कर 17.34 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित किए, प्री-लिटिगेशन मामले भी सुलझे।
तस्वीर में चित्तौड़गढ़ में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान अधिकारी लोगों से बातचीत करते दिख रहे हैं।
चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ में आयोजित इस वर्ष की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सहमति से 96 हजार 330 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। इन प्रकरणों में कुल 17 करोड़ 34 लाख रुपये के अवार्ड पारित किए गए। वहीं, बैंक लोन, चेक अनादरण सहित विभिन्न विभागों से संबंधित 50,241 प्री-लिटिगेशन आवेदनों का निस्तारण कर 2.89 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित किए गए।
राष्ट्रीय एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष मान सिंह चूण्डावत के आदेशानुसार शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसका शुभारम्भ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष मान सिंह चूण्डावत एवं सचिव योगिता पारीक ने मां सरस्वती को माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जिले की विभिन्न न्यायालयों में विभिन्न प्रकृति के राजीनामा योग्य प्रकरणों का आपसी सहमति के आधार पर निस्तारण किया गया। इस प्रक्रिया में कुल 96 हजार 330 प्रकरणों का निस्तारण हुआ और 17 करोड़ 34 लाख रुपये के अवार्ड पारित किए गए।
इसके अतिरिक्त बैंक लोन, चेक अनादरण, बिजली विभाग, जलदाय विभाग, टेलीफोन विभाग एवं राजस्व विभाग से संबंधित कुल 50,241 प्री-लिटिगेशन आवेदनों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में 2.89 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित किए गए। प्रकरणों के निस्तारण के लिए कुल 15 बेंचों ने कार्य किया।
प्राधिकरण अध्यक्ष मान सिंह चूण्डावत एवं सचिव योगिता पारीक ने जिला मुख्यालय पर गठित बेंचों की कार्यवाही का अवलोकन किया। इस दौरान सचिव योगिता पारीक ने महाराणा प्रताप लॉ कॉलेज के छात्रों को लोक अदालत की भूमिका एवं कार्यप्रणाली की जानकारी दी।
सचिव ने पक्षकारों से भी संवाद किया। उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सफल बनाने में सहयोग करने वाले न्यायिक अधिकारियों, बेंच के सदस्यों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों, न्यायिक कर्मचारियों एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से जिले में हजारों प्रकरणों का निस्तारण होने के साथ विभिन्न विभागों से जुड़े प्री-लिटिगेशन मामलों का भी आपसी सहमति के आधार पर समाधान किया गया।