चित्तौड़गढ़: भीषण गर्मी और लू से जनजीवन प्रभावित, तापमान 46 डिग्री पहुंचा
नौतपा के दौरान चित्तौड़गढ़ में लू का प्रकोप जारी, बाजारों में सन्नाटा और पशु-पक्षियों के लिए पानी का संकट बढ़ा।
चित्तौड़गढ़ में भीषण गर्मी और लू से बचने के लिए सिर पर कपड़ा रखकर निकलते हुए स्थानीय लोग।
चित्तौड़गढ़ जिले में इन दिनों सूर्यदेव का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। पिछले एक पखवाड़े से जारी प्रचंड गर्मी और जानलेवा लू ने आमजन का जीना मुहाल कर दिया है। भीषण गर्मी का आलम यह है कि सुबह के 9 बजते ही चिलचिलाती धूप और गर्म हवाएं अपना असर दिखाना शुरू कर देती हैं। दोपहर होते-होते आसमान से आग बरसने लगती है, जिससे तापमान 46 डिग्री सेल्सियस के स्तर तक जा पहुंचा है। नौतपा के चलते गर्मी अपने चरम पर है और लोग जरूरी कामों के बिना घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
इस भीषण गर्मी की सबसे बड़ी मार स्थानीय व्यापार पर पड़ी है। जिन बाजारों में आम दिनों में ग्रामीण इलाकों से आने वाले ग्राहकों की भारी चहल-पहल रहती थी, वहां इन दिनों दोपहर में कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसरा रहता है। व्यापारियों का कहना है कि दोपहर के समय ग्राहक पूरी तरह नदारद रहते हैं। शाम को भी तपिश कम नहीं हो रही है, जिसके कारण शाम 7 बजे तक भी बाजारों में वह रौनक नहीं लौट पा रही है, जो सामान्य दिनों में होती थी। इस वीरानी के चलते व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
दिन में चलने वाले लू के थपेड़ों से बचने के लिए लोग नाना प्रकार के जतन कर रहे हैं। घरों और दफ्तरों में लोग कूलर, पंखे और एयर कंडीशनर के सहारे राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ती गर्मी के आगे ये इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी हांफते नजर आ रहे हैं। सड़कों पर आवाजाही बेहद कम हो गई है। दुपहिया वाहन चालक अपने चेहरे और सिर को सूती कपड़े से ढककर निकल रहे हैं, जबकि लोग गर्मी से राहत पाने के लिए तरबूज, गन्ने का रस, छाछ और नींबू पानी जैसे ठंडे पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं।
इस भीषण गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि मवेशियों और पक्षियों पर भी साफ देखा जा सकता है। तालाब और जलस्त्रोत सूखने की कगार पर हैं, जिससे बेजुबान जानवरों के लिए पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। दोपहर के समय आवारा पशु और मवेशी पेड़ों के नीचे या अन्य छायादार स्थानों पर दुबककर गर्मी से बचने का असफल प्रयास करते नजर आते हैं। पक्षी भी घने पेड़ों में छिपकर खुद को झुलसाने वाली हवाओं से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। स्थिति की गंभीरता इस बात से स्पष्ट है कि गर्मी का यह प्रकोप मानव जीवन से लेकर पशु-पक्षियों और अर्थव्यवस्था तक को पूरी तरह प्रभावित कर चुका है।