चित्तौड़गढ़: बोजुंदा जीवाश्म पार्क के संरक्षण हेतु बैठक आयोजित
सांसद चंद्रप्रकाश जोशी ने बोजुंदा जीवाश्म पार्क स्टिकर का विमोचन किया और चित्तौड़गढ़ दुर्ग के ऐतिहासिक द्वार को वापस लाने के निर्देश दिए।
चित्तौड़गढ़ में आयोजित बैठक में सांसद चंद्रप्रकाश जोशी ने बोजुंदा जीवाश्म पार्क के संरक्षण हेतु स्टिकर का विमोचन किया और ऐतिहासिक अष्टधातु द्वार वापसी पर चर्चा की। (बाएं से दाएं: मनीष मालीवाल, विजय अजमेरा, गौरव बोकड़िया, मनीष महंत, डॉ. गोपाल सालवी, सांसद चंद्रप्रकाश जोशी, अमित अग्रवाल, डॉ. सुशीला लड्ढा, प्रेमचंद शर्मा, शांतिलाल भराड़िया, भरत माहेश्वरी, डॉ. कुंदन जैन)
चित्तौड़गढ़ स्थित भू-विरासत के प्रमुख स्थल बोजुंदा जीवाश्म पार्क के संरक्षण और विकास को लेकर भारतीय सांस्कृतिक निधि परिषद् (इंटेक) की एक अहम बैठक सांसद कार्यालय में आयोजित की गई। सांसद चंद्रप्रकाश जोशी के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुई इस बैठक में जीवाश्म पार्क के गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुँचाने के लिए एक विशेष स्टिकर का विमोचन किया गया। इंटेक की कन्वीनर डॉ. सुशीला लड्ढा ने बताया कि लंबे समय से बोजुंदा जीवाश्म पार्क के विकास की मांग की जा रही थी। कार्यक्रम संयोजक डॉ. गोपाल सालवी ने बताया कि यहाँ पाए गए विविध प्रकार के जीवाश्मों से आमजन और छात्रों को अवगत कराने के उद्देश्य से इस स्टिकर को तैयार किया गया है। मनीष मालीवाल और डॉ. कुंदन जैन ने स्पष्ट किया कि यह स्टिकर छात्रों एवं शोधार्थियों को 80 करोड़ वर्ष पूर्व समुद्र और जीवन के प्रथम साक्ष्य की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा।
बैठक के दौरान चित्तौड़गढ़ दुर्ग के ऐतिहासिक अष्टधातु द्वार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। डॉ. लड्ढा ने बताया कि एक हजार ईस्वी में सूरजपोल पर लगा 8 टन वजनी यह द्वार 1303 में अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली ले गया था, जिसे 1764 में भरतपुर के महाराजा सूरजमल के पुत्र जवाहर सिंह दिल्ली से भरतपुर के लोहागढ़ दुर्ग ले आए थे। वर्तमान में यह उसी के उत्तरी प्रवेश द्वार पर स्थापित है। इसे लेकर इंटेक सदस्यों ने एक रिप्लिका की मांग की, ताकि पर्यटक इसके इतिहास से परिचित हो सकें। सांसद जोशी ने इस पर ऐतिहासिक पहल करते हुए मूल प्रवेश द्वार को ही चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर वापस लाने हेतु संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए, जिसका सदस्यों ने आभार व्यक्त किया।
इसके अतिरिक्त, डॉ. सालवी ने प्राचीन शिवि जनपद की राजधानी माध्यमिका नगरी में स्थित चौथी शताब्दी के ऊबदीवड़ प्रकाश स्तंभ या ध्वज स्तंभ के संरक्षण के लिए एक कार्ययोजना प्रस्तुत की। सांसद ने इस विरासत को संजोने के लिए भी संबंधित विभाग को निर्देशित किया। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारी प्रेमचंद शर्मा, इंटेक सदस्य शांतिलाल भराड़िया, भरत माहेश्वरी, गौरव बोकड़िया, अमित अग्रवाल, मनीष महंत और विजय अजमेरा सहित अनेक प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे। यह पहल चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक और भू-वैज्ञानिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी।