शिक्षकों को बदलती शैक्षिक जरूरतों के अनुरूप खुद को अपडेट करना होगा : डीईईओ दशोरा
चित्तौड़गढ़ डाइट परिसर में दो दिवसीय जिला शैक्षिक सम्मेलन का समापन हुआ। डीईईओ प्रमोद कुमार दशोरा ने शिक्षकों से बदलती शैक्षिक जरूरतों के अनुसार अपडेट रहने की बात कही। सम्मेलन में शिक्षक हित और विद्यार्थी विकास पर मंथन हुआ।
तस्वीर में चित्तौड़गढ़ के डाइट परिसर में आयोजित जिला शैक्षिक सम्मेलन के दौरान मंच पर मौजूद अतिथि और शिक्षक-शिक्षिकाएं दिखाई दे रहे हैं।
चित्तौड़गढ़ स्थित डाइट परिसर में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा), जिला शाखा चित्तौड़गढ़ के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय जिला शैक्षिक सम्मेलन का शनिवार को समापन हुआ। सम्मेलन में जिलेभर से आए शिक्षक-शिक्षिकाओं ने शिक्षा की गुणवत्ता, बदलते शैक्षिक परिवेश, नवाचार, शिक्षक हित और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया।
समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार दशोरा ने कहा कि शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे में शिक्षकों को नई तकनीक, नवीन शिक्षण पद्धतियों और विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों के अनुरूप स्वयं को लगातार अपडेट करते रहना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला मार्गदर्शक है।
प्रमोद कुमार दशोरा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों के ज्ञान, व्यवहार और व्यक्तित्व के समग्र विकास पर ध्यान देना आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष कैलाश चंद्र मालू ने की। उन्होंने कहा कि शिक्षक ज्ञान के साथ विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन, जिम्मेदारी और सामाजिक चेतना विकसित करें। विद्यालयों को शिक्षा के साथ संस्कार, सेवा और पर्यावरण संरक्षण के केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है।
सम्मेलन में शिक्षक हितों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। प्रवासी कार्यकर्ता एवं चित्तौड़गढ़ जिला पालक जयपुर से आई निधि छींपा ने कहा कि प्रदेश कार्यकारिणी शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश स्तर के अधिकारियों से संवाद कर समस्याओं को समाधान तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
निधि छींपा ने कहा कि संविदा कार्मिकों के स्थायीकरण का प्रकरण मुख्यमंत्री स्तर पर लंबित है। आचार संहिता के बाद इस दिशा में पहल होने की संभावना है। तृतीय श्रेणी अध्यापकों से संबंधित न्यायालयीन प्रकरण के समाधान के बाद पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि संगठन शिक्षक कल्याण समिति बोर्ड के गठन के लिए भी प्रयासरत है।
सम्मेलन में शिक्षकों ने विद्यालयों में किए जा रहे नवाचारों और अपने अनुभवों को साझा किया। स्थानीय संसाधनों एवं समुदाय की सहभागिता से विद्यालयों को अधिक उपयोगी बनाने तथा विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के अनुरूप शिक्षण प्रक्रिया विकसित करने पर जोर दिया गया।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ खेल, योग, कला, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। विद्यालयों को संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रभाव विकसित करने के केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी विचार हुआ।
विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी सतीश दशोरा एवं डाइट चित्तौड़गढ़ के प्रशासनिक अधिकारी राकेश सुखवाल उपस्थित रहे। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षकों की सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
सम्मेलन का मूल भाव “राष्ट्र के हित में शिक्षा, शिक्षा के हित में शिक्षक तथा शिक्षक के हित में समाज” रहा।
सम्मेलन में जिला उपाध्यक्ष दीपिका झाला, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष भंवर सिंह मुरलिया, संभाग संयुक्त मंत्री तेजपाल सिंह शक्तावत, जिला महिला संगठन मंत्री मधु जैन, जिला उपाध्यक्ष हमीर सिंह राजपूत, जिला संगठन मंत्री जोगेन्द्र सिंह राणावत, जिला मंत्री निर्भयराम धाकड़ सहित जिला एवं खंड टोली के पदाधिकारी उपस्थित रहे। माध्यमिक शिक्षा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ऋषिन चौबीसा का संगठन सानिध्य रहा।
सम्मेलन के संयोजक महेशचन्द्र नुवाल रहे। आयोजन में पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
दो दिवसीय सम्मेलन में एक हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सहभागिता की। समापन पर शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक हित और विद्यार्थी केंद्रित शिक्षा को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया गया। चित्तौड़गढ़ खंड अध्यक्ष कालू लाल रायका, कार्यकारिणी व कार्यकर्ताओं के आर्थिक सहयोग से यह दो दिवसीय जिला शैक्षिक सम्मेलन संपन्न हुआ।