तस्वीर में बोहेड़ा के बाजार में भगवा वस्त्र और कांवड़ उठाए चलते हुए बच्चे और श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।

बड़ी सादड़ी। श्रावण माह के पवित्र अवसर पर बोहेड़ा में चौथी बार भव्य कावड़यात्रा एवं महाप्रसादी का आयोजन हुआ। गांव के सबसे बड़े सामूहिक आयोजनों में शामिल इस कावड़यात्रा में दानदाताओं ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। यात्रा के दौरान भगवान शिव और श्रद्धालुओं पर कहीं जेसीबी से तो कहीं ड्रोन से पुष्पवर्षा की गई।

कावड़यात्रा का शुभारंभ श्रीजीतेश्वर महादेव मंदिर से हुआ। यहां गांव के गणमान्य नागरिकों, कावड़ियों और मातृशक्ति ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर यात्रा को रवाना किया। बैंड-बाजे, ढोल-ताशे और डमरू की धुन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए।

यात्रा का मुख्य आकर्षण महाकाल की सवारी रही। वहीं नन्हे-मुन्ने बच्चों ने बाल शिव का रूप धारण कर कावड़ उठाई। 151 कांवड़ियों के साथ 3000 से अधिक श्रद्धालुओं ने कावड़यात्रा में भाग लिया और भगवान शिव की भक्ति में उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

कावड़यात्रा रावलाचौक, राधाकृष्ण, गणपति, चारभुजाजी, चामुंडामाता, ठाकुरजी, शिवालय, रामजानकी, धर्मराज, पंचवटी, लाखनसुर बालाजी एवं आसावरा माताजी मंदिर होते हुए श्री नालेश्वर महादेव मंदिर, बांसी पहुंची। यहां श्री नालेश्वर महादेव विकास एवं पर्यावरण समिति की ओर से महाकाल सवारी का भव्य स्वागत किया गया।

कांवड़ यात्रा में बोहेड़ा के अलावा आसपास के कई गांवों के श्रद्धालु भी शामिल हुए। बच्चों और महिलाओं ने पूरे उत्साह एवं श्रद्धाभाव के साथ यात्रा में भाग लिया। श्रद्धालु भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए और भजनों पर झूमते हुए नालेश्वर महादेव के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान पूरा मार्ग भक्तिमय वातावरण से गूंजता रहा।

कावड़यात्रा मार्ग पर बोहेड़ा, भियाना और बांसी में जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। गांव में विभिन्न स्थानों पर भक्तों ने केले का प्रसाद वितरित किया। आसावरा माताजी में श्रद्धालुओं का स्वागत कर खीर का प्रसाद भी वितरित किया गया।

श्री नालेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में पहुंचने के बाद जलाभिषेक एवं आरती की गई। इसके पश्चात सभी भक्तों ने भोजन महाप्रसादी का आनंद लिया। चौथी बार आयोजित यह कावड़यात्रा 151 कांवड़ियों और 3000 से अधिक श्रद्धालुओं की भागीदारी के साथ संपन्न हुई।

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