बेगूं के बड़ोदिया महादेव रामधाम आश्रम में 54वें नवरात्रि महोत्सव में सेवा धर्म की महिमा बताई
बेगूं के बड़ोदिया महादेव रामधाम आश्रम में 54वें नवरात्रि महोत्सव के तीसरे दिन आचार्य पंडित अजय शर्मा ने रामचरितमानस वाचन के दौरान सेवा धर्म की महिमा बताई। मंगलवार को राम-परशुराम संवाद, धनुष भंग और श्रीसीताराम विवाह प्रसंगों का वाचन हुआ।
तस्वीर में बेगूं के सत्संग भवन में सजाए गए पंडाल के नीचे बैठकर रामचरितमानस पाठ करतीं श्रद्धालु महिलाएं और पुरुष।
बेगूं (प्रातःकाल संवाददाता)। बेगूं नगर में गंगा स्वरूप ब्राह्मणी नदी के तट पर स्थित बड़ोदिया महादेव रामधाम आश्रम के रामायण मंडल सत्संग भवन में आयोजित 54वें नवरात्रि महोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार को सेवा धर्म की महिमा का वर्णन किया गया। मानस व्यास आचार्य पंडित अजय शर्मा ने संगीतमय रामचरितमानस वाचन के दौरान सेवा को जीवन का महत्वपूर्ण धर्म बताते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला।
पंडित अजय शर्मा ने रामचरितमानस की चौपाई “आगम निगम पुरान बखाना, सेवा धर्म कठिन जग जाना” के माध्यम से बताया कि धर्मशास्त्रों में सेवा को सबसे कठिन धर्म माना गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अच्छे कार्य की शुरुआत सेवा भाव से होती है और सेवा के बिना किसी भी कार्य की सफलता संभव नहीं है। माता-पिता, गुरु, दीन-दुखियों, बड़े-बुजुर्गों और भक्तों की सेवा जीवन में अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को जब भी और जहां भी सेवा करने का अवसर मिले, उसे सद्भाव और समर्पण के साथ स्वीकार करना चाहिए। जीवन में सेवा भाव को प्राथमिकता देने वाला व्यक्ति ऐसी उपलब्धियां भी प्राप्त कर सकता है, जिन्हें हासिल करना बड़े तप के बाद भी कठिन होता है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से जीवन में सेवा और परोपकार की भावना बनाए रखने का संदेश दिया।
रामायण मंडल के महामंत्री एडवोकेट परीक्षित बिल्लू ने बताया कि मंगलवार को मानस पाठ के दौरान भगवान श्रीराम और परशुराम संवाद, धनुष भंग प्रसंग तथा श्रीसीताराम विवाह का भावपूर्ण वाचन किया गया।
उन्होंने बताया कि बुधवार को भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी, श्रीसीताराम संवाद और श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा संवाद का वाचन किया जाएगा। 54वें नवरात्रि महोत्सव में रामचरितमानस के प्रसंगों के माध्यम से सेवा, समर्पण और परोपकार के महत्व को प्रस्तुत किया जा रहा है।