सीमा पर सेना, राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की अहम भूमिका: संत दिग्विजयराम, सम्मेलन में जुटे एक हजार से अधिक शिक्षक
बड़ीसादड़ी में जिला शैक्षिक सम्मेलन के शुभारंभ पर संत दिग्विजयरामजी महाराज ने शिक्षक की राष्ट्र निर्माण में भूमिका बताई। सम्मेलन में एक हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया और शिक्षा से जुड़े विषयों पर मंथन किया।
तस्वीर में बड़ीसादड़ी में आयोजित जिला शैक्षिक सम्मेलन के दौरान संत दिग्विजयरामजी महाराज और अन्य अतिथि वंदे मातरम् के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में तैयार पोस्टर का विमोचन करते हुए नजर आ रहे हैं।
बड़ीसादड़ी में डाइट परिसर में शुक्रवार को दो दिवसीय जिला शैक्षिक सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में जिलेभर से एक हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया। रामद्वारा, चित्तौड़गढ़ के संत दिग्विजयरामजी महाराज ने उद्घाटन सत्र में कहा कि सीमा पर तैनात सैनिक जिस तरह राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करते हैं, उसी तरह शिक्षक राष्ट्र की भावी पीढ़ी को संस्कार, शिक्षा और दिशा देकर राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। संत, सेना और शिक्षक तीनों मिलकर राष्ट्र निर्माण की मजबूत आधारशिला रखते हैं।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा), जिला शाखा चित्तौड़गढ़ के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक हित, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, संस्कार निर्माण और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर मंथन किया गया।
संत दिग्विजयरामजी महाराज ने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा में पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं है। शिक्षक अपने आचरण, विचार और व्यवहार से विद्यार्थियों को जीवन की दिशा देता है। एक अच्छा शिक्षक परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने शिक्षा में संस्कार, सदाचार, सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभाव को आवश्यक बताया।
सम्मेलन में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में तैयार पोस्टर का विमोचन संत दिग्विजयरामजी महाराज ने किया। इस अवसर पर बताया गया कि 27 सितंबर को राजस्थान के सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में एक साथ वंदे मातरम् का उच्चारण किया जाएगा। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं में राष्ट्रभाव एवं देश के प्रति सम्मान की भावना मजबूत करने का संदेश दिया गया।
सम्मेलन का मूल भाव “राष्ट्र के हित में शिक्षा, शिक्षा के हित में शिक्षक तथा शिक्षक के हित में समाज” रहा। उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत बाल कार्य एवं मिलन प्रमुख दिनेशचन्द्र भट्ट ने कहा कि शिक्षक की भूमिका पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों में संस्कार, राष्ट्रभाव और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका है।
दिनेशचन्द्र भट्ट ने कहा कि योग केवल आसन करने तक सीमित नहीं है। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि को जीवन में आत्मसात करना ही योग का व्यापक स्वरूप है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष कैलाश चन्द्र मालू ने की। उन्होंने सम्मेलन की रूपरेखा एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए शिक्षकों से बदलते शैक्षिक परिवेश के अनुरूप अपनी भूमिका को और प्रभावी बनाने का आह्वान किया।
सम्मेलन में माध्यमिक शिक्षा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ऋषिन चौबीसा का संगठन सानिध्य रहा। प्रदेश वरिष्ठ सदस्य निधि छींपा ने भी सहभागिता की। विभिन्न खंडों से आए शिक्षक-शिक्षिकाओं ने शिक्षा की वर्तमान चुनौतियों, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा विद्यालयों को ज्ञान एवं संस्कार के केंद्र के रूप में विकसित करने को लेकर विचार साझा किए।
कार्यक्रम में जिला उपाध्यक्ष दीपिका झाला, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष भंवर सिंह मुरलिया, संभाग संयुक्त मंत्री तेजपाल सिंह शक्तावत, जिला महिला संगठन मंत्री मधु जैन एवं जिला उपाध्यक्ष हमीर सिंह राजपूत सहित संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सम्मेलन के तृतीय सत्र के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम लाल गौड़ रहे। विशिष्ट अतिथि मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, चित्तौड़गढ़ शंभूलाल सोमानी एवं अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र दशोरा रहे। अतिथियों ने शिक्षा व्यवस्था, शिक्षक की जिम्मेदारियों तथा विद्यार्थियों के हित में प्रभावी शैक्षिक वातावरण तैयार करने पर विचार रखे।
जिला संगठन मंत्री जोगेन्द्र सिंह राणावत, जिला मंत्री निर्भयराम धाकड़ सहित जिला एवं खंड टोली के पदाधिकारियों ने सम्मेलन की व्यवस्थाओं एवं आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया। सम्मेलन के संयोजक महेशचन्द्र नुवाल रहे। दो दिवसीय जिला शैक्षिक सम्मेलन में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक की भूमिका, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर शिक्षकों एवं शिक्षा अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श हुआ।