तस्वीर में बड़ी सादड़ी में आयोजित शिव पुराण कथा के दौरान संत दिग्विजय राम प्रवचन देते दिख रहे हैं।

बड़ी सादड़ी। चित्तौड़गढ़ रामद्वारा में चातुर्मासिक सत्संग के तहत आयोजित महा शिव पुराण कथा में संत दिग्विजय राम महाराज ने कहा कि बिना तप किए किसी भी तरह की सिद्धि प्राप्त नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि माता पार्वती ने भगवान महादेव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए हजारों साल तक तपस्या की थी। गुरु के वचनों पर अडिग रहने वाला ही जीवन में आगे बढ़ता है।

संत दिग्विजय राम महाराज ने कथा प्रसंग सुनाते हुए कहा कि माता पार्वती ने भगवान महादेव को पाने के लिए तीन हजार साल तक तपस्या की थी। महादेव के कहने पर सप्त ऋषि माता पार्वती के पास पहुंचे और उनके समक्ष नारद ऋषि तथा भगवान शिव की बुराई की। सप्त ऋषियों ने माता पार्वती से कहा कि तुम बुद्धिमान होकर भी नारद की बातों में आ रही हो। आज तक जिसने भी नारद की बात मानी है, उसे जीवन में हानि ही हुई है।


माता पार्वती ने सप्त ऋषियों की बातों के बावजूद स्पष्ट कहा कि नारद ऋषि उनके गुरु हैं और वे गुरु के वचनों पर अडिग हैं, क्योंकि गुरु के वचन कल्याणकारी होते हैं। पार्वती ने कहा कि वे हिमालय पुत्री हैं, इसलिए उनका हृदय भी पत्थर के समान है और वे अपना हट छोड़ने वाली नहीं हैं। इसके बाद भी माता पार्वती महादेव की तपस्या पर अडिग रहीं।

संत दिग्विजय राम महाराज ने कहा कि गुरु के वचनों पर पूर्ण विश्वास रखने वाले को लोक और परलोक दोनों में सुख प्राप्त होता है। माता पार्वती ने सप्त ऋषियों से कहा कि वे महादेव से ही विवाह करेंगी। जब माता पार्वती सप्त ऋषियों की परीक्षा में पास हो गईं तो स्वयं भगवान महादेव वृद्ध ब्राह्मण का रूप धारण कर माता पार्वती की परीक्षा लेने पहुंच गए।

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