अच्छाई और बुराई वस्तु में नहीं, कर्म में होती है, जीवन को साधना और आचरण से महान बनाएं
बड़ी सादड़ी के समता भवन में चातुर्मास के तहत 34 दिनों से चल रही प्रवचन श्रृंखला में निश्चल मुनि मसा ने कर्म, सत्य, साधना, आचरण और आत्मा की रक्षा को धर्म का आधार बताया।
तस्वीर में बड़ी सादड़ी के समता भवन परिसर में कार्यक्रम के दौरान नजर आ रहे श्रद्धालु और गणमान्य लोग।
बड़ी सादड़ी में समता भवन में साधुमार्गी जैन संघ के तत्वावधान में चातुर्मास के निमित्त विगत 34 दिनों से लगातार चल रही प्रवचन श्रृंखला में निश्चल मुनि मसा आदि ठाणा 2 ने श्रावकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अच्छाई और बुराई वस्तु में नहीं, बल्कि कर्म में होती है। कोई बांस से तीर बनाता है तो कोई उसी बांस से बांसुरी बनाता है।
निश्चल मुनि मसा ने कहा कि जीवन में हर व्यक्ति साधनों से नहीं, साधना से महान बनता है। वह ऊंचे भवनों से नहीं, भावनाओं से महान बनता है तथा उच्चारण से नहीं, उच्च आचरण से महान बनता है। उन्होंने बताया कि मोक्ष और ज्ञान की पहली सीढ़ी सत्य है।
मुनि श्री ने कहा कि जीवन में हमेशा सुनाने वाला खोता है तथा सुनने वाला पाता है। इसलिए सबसे पहले व्यक्ति के लिए अच्छा श्रोता बनना आवश्यक है। आत्मा को बलवान बनाने के लिए तीर्थंकरों की वाणी सुनना आवश्यक है। आत्मा के हित के लिए किया गया छोटा से छोटा आचरण ही अनुष्ठान कहलाता है।
उन्होंने कहा कि धर्म हमेशा आत्मा का पोषण करता है तथा जीवन में विकारों का नाश करता है। मानव जीवन में धर्म की आंख से देखने पर कलयुग में भी सतयुग का आभास हो सकता है। आत्मा की रक्षा ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है। मन, वचन और काया की शुद्धता से किया गया कार्य ही धर्म की प्राप्ति का सुगम मार्ग है।
निश्चल मुनि मसा ने कई उदाहरणों के माध्यम से बताया कि व्यक्ति हमेशा जीवित नहीं रहता, उसका व्यक्तित्व जीवित रहता है। इसके लिए जीवन में श्रेष्ठ पुरुषार्थ करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में संघ के अध्यक्ष महावीर कुमार मेहता एवं मंत्री सुरेश कुमार सहलोत ने अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। श्रावक रामेश्वर लाल दशोरा ने गुरु महिमा के भजन की प्रस्तुति दी।