तस्वीर में भीलवाड़ा के चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव के दौरान मंच के पास खड़े श्रद्धालु और आचार्य पुलकसागर महाराज नजर आ रहे हैं।

भीलवाड़ा, 26 अगस्त। इंसान के तन का पेट तो भर सकता है, लेकिन मन का पेट कभी नहीं भरता। कितना भी डालो, वह खाली ही रहता है। मन की इसी अतृप्ति को फूटी बाल्टी की उपमा देते हुए राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि मन की फूटी बाल्टी में संतोष का पैंदा लगा लिया जाए तो जीवन आनंदमय हो जाएगा।

भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे आचार्य पुलकसागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में बुधवार को प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि इंसानी मन उस बाल्टी के समान है, जिसका पैंदा फूटा होने के कारण उसमें समुद्र का सारा पानी डाल देने पर भी वह खाली ही रहती है। सांसारिक सुखों की मृग मरीचिका में भटकने वाला व्यक्ति जिंदगी भर भटकता रहता है, लेकिन सुख की प्राप्ति नहीं होती।



आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि संतोष सबसे बड़ा धन है। जिसने संतोष प्राप्त कर लिया, उसे अन्य किसी धन को पाने की आवश्यकता नहीं रह जाती। जिनके जीवन में संतोष नहीं है, उनके मन की फूटी बाल्टी कोई नहीं भर सकता। जीवन में दो शब्द हमेशा याद रखने चाहिए। दुःखी होना है तो ‘ओर’ और सुखी होना है तो ‘बस’ को याद रखें। ‘ओर’ शब्द में कोई फुलस्टॉप नहीं होता, इसलिए व्यक्ति जिंदगी भर भटकता रहता है। वहीं ‘बस’ बोलना सीख गए तो जीवन में आनंद आ जाएगा। ‘ओर’ शब्द फूटी बाल्टी और ‘बस’ शब्द संतोष का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि संतोष धन जिसके जीवन में आ गया, वह पर्णकुटी में भी आनंद के साथ जी सकता है। परमात्मा से और मांगकर दुःखी होने की बजाय जो मिला है, उसमें संतोष करके सुखी जीवन बिताना चाहिए। जो नहीं मिला, उसके लिए आंसू बहाने के बजाय जो मिला है, उसके लिए परमात्मा को धन्यवाद देकर सुख से उसका उपभोग करना चाहिए।



पर्युषण पर्व को लेकर आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जैन समाज के पर्युषण महापर्व आने वाले हैं। त्याग और तपस्याओं की गंगा प्रवाहित होने वाली है। पहले आठ दिन श्वेताम्बर जैन समाज और फिर 10 दिन दिगम्बर जैन समाज पर्युषण महापर्व मनाएगा। उन्होंने कहा कि कई लोग पूछते हैं कि ये पर्युषण अलग-अलग क्यों मनाए जाते हैं। इस पर वे कहते हैं कि यदि एक साथ मनाए जाएंगे तो दस दिन के ही पर्युषण होंगे, लेकिन अलग-अलग मनाने से 18 दिन पर्युषण पर्व की आराधना होती है। इस बार चातुर्मास भीलवाड़ा में होने के कारण यहां 18 दिन पर्युषण की आराधना होगी। उन्होंने कहा, उनके पर्युषण भी हमारे होंगे और हमारे पर्युषण भी उनके होंगे।

आचार्य पुलकसागर महाराज ने अपने मन में किसी भी तरह के गलत विचार को स्थान नहीं देने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी के प्रति मन में आया एक गलत विचार पूरी जिंदगी बर्बाद कर सकता है। जब भी मन में गलत विचार आए, उसे वहीं कुचल देना चाहिए और उसे पल्लवित नहीं होने देना चाहिए। एक गलत विचार सारे रिश्तों और दोस्ती पर पानी फेर सकता है। एक गलत विचार भक्त और भगवान के रिश्ते को भी बिगाड़ सकता है।

आचार्यश्री ने कहा कि चिता मुर्दे को जलाती है, लेकिन चिंता जीते-जी खोखला कर देती है। व्यक्ति की जिंदगी में एक पल की खबर नहीं है, लेकिन वह 100 वर्ष का सामान जुटाने में लगा हुआ है। व्यक्ति के शरीर की बीमारी का उपचार हो सकता है, लेकिन मन की बीमारी का कोई उपचार नहीं है। उन्होंने कहा कि जिंदगी में कल की चिंता छोड़कर आज में जीना सीखना चाहिए।

प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन, आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य महेन्द्रकुमार दीपक दिवित सोगानी परिवार ने प्राप्त किया। समाजसेवी गोविन्द सोड़ाणी ने आचार्यश्री को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा सहित अन्य पदाधिकारियों ने किया।

त्रिशला महिला मण्डल की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। आठ वर्षीय बालिका तक्ष्वी सोड़ाणी ने शिव पुराण मंत्रों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह ने किया।

भीलवाड़ा शहर एवं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने के लिए चित्रकूटधाम पहुंचे। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन हो रहे हैं। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

Tags: