भीलवाड़ा के गंगापुर स्थित उपखंड कार्यालय परिसर के बाहर पंचायत समिति चुनाव प्रक्रिया और नामांकन वापसी के दौरान उपस्थित कांग्रेस नेता और स्थानीय कार्यकर्ता।   

गंगापुर, भीलवाड़ा। पंचायत समिति सहाड़ा के चुनावी रण में नाम वापसी के बाद सियासी समीकरणों में बदलाव आया है। टिकट वितरण के बाद बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों को मनाने के लिए कांग्रेस और भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी। नाम वापसी के दिन कई प्रत्याशियों के चुनाव से हटने के बाद दोनों प्रमुख दलों ने राहत की सांस ली है। अब अधिकृत उम्मीदवारों की स्थिति मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की चुनौती दोनों दलों के सामने है।

पंचायत समिति सहाड़ा में नाम वापसी की प्रक्रिया निर्वाचन अधिकारी विवेक गुर्जर के समक्ष पूरी हुई। इस दौरान अलग-अलग वार्डों से कई प्रत्याशियों ने अपने नामांकन वापस ले लिए। वार्ड संख्या 3 से गीता देवी, वार्ड संख्या 5 से सुगना देवी, वार्ड संख्या 6 से ज्योति कंवर, वार्ड संख्या 8 से सुरेश रैगर, वार्ड संख्या 9 से नारू लाल और वार्ड संख्या 11 से मुकेश कुमार अहीर ने नाम वापस लिया। इसी तरह वार्ड संख्या 12 से इंद्रा जाट और कांता देवी, वार्ड संख्या 14 से तारादेवी शर्मा, वार्ड संख्या 16 से नारायण सिंह और शंभू लाल जाट तथा वार्ड संख्या 18 से बाली ने भी चुनाव मैदान छोड़ दिया।

नाम वापसी की यह प्रक्रिया पंचायत समिति चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टिकट नहीं मिलने या अन्य राजनीतिक कारणों से नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के मैदान में बने रहने से कांग्रेस और भाजपा के अधिकृत उम्मीदवारों के सामने चुनौती बढ़ सकती थी। ऐसे में कई प्रत्याशियों के नामांकन वापस लेने से संबंधित वार्डों में चुनावी मुकाबले की स्थिति प्रभावित होने की संभावना है। दोनों दलों के लिए बागियों को मनाना इसलिए भी अहम रहा, क्योंकि अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी से पार्टी के परंपरागत वोटों में बंटवारे की आशंका रहती है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सोहनलाल जाट के परिवार से जुड़े मामले की रही। उनकी पुत्रवधू पायल जाट के सामने बागी होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करने वाली परवीन ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया। परवीन के चुनाव मैदान से हटने को कांग्रेस के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इससे पायल जाट के सामने चुनावी मुकाबले की स्थिति में कितना बदलाव आएगा, यह चुनाव प्रचार और मतदाताओं के रुझान से स्पष्ट होगा।

नाम वापसी की प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस नेता शंकर लाल जाट सहित अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस बीच राजनीतिक गलियारों में बागी प्रत्याशियों की नाम वापसी को लेकर चर्चाएं तेज रहीं। कांग्रेस और भाजपा, दोनों के लिए अपने अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को मनाना प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था। नाम वापसी के बाद दोनों दलों को कुछ वार्डों में राहत जरूर मिली है, लेकिन चुनावी परिणाम पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

अब पंचायत समिति सहाड़ा के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा का जोर अपने अधिकृत प्रत्याशियों की स्थिति मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने और मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर रहेगा। नामांकन वापस लेने वाले प्रत्याशियों के हटने से चुनावी समीकरणों में बदलाव की संभावना के बीच दोनों दलों की आगे की रणनीति महत्वपूर्ण होगी। आखिर बागियों को मनाने में मिली सफलता कितनी वोटों में तब्दील होती है और पंचायत समिति सहाड़ा की सत्ता की राह किस दल के लिए आसान बनती है, इसका फैसला मतदान के दिन होगा।

Tags: