तस्वीर में गंगापुर में आयोजित नानी बाई के मायरे के दौरान व्यास पीठ पर कथा कहते कथावाचक आनंद कृष्ण शास्त्री और उपस्थित महंत श्री श्याम सुंदर दास जी महाराज।

गंगापुर में श्री बजरंग कीर्तन सांस्कृतिक कला मंडल के स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर आयोजित नानी बाई के मायरे में आनंद कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भक्त सच्चे भाव से परमात्मा को याद करते हैं तो भगवान तत्काल प्रकट हो जाते हैं। भगवान की भक्ति के लिए सच्चे भाव और हरि के प्रति समर्पण का होना आवश्यक है।

कथा के दौरान आनंद कृष्ण शास्त्री ने नरसी मेहता के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब-जब नरसी मेहता के जीवन में समस्याएं आईं, तब-तब भगवान श्रीकृष्ण उन्हें दूर करने के लिए पहुंच गए। उन्होंने कहा कि मनुष्य द्वारा किए गए सत्कर्मों को भगवान कई गुना करके लौटाते हैं।

आज की कथा में नरसिंह द्वारा मंदिर के महंत श्री श्याम सुंदर दास जी महाराज का आगमन हुआ। इस अवसर पर व्यास पीठ से महंत श्री श्याम सुंदर दास जी महाराज का स्वागत और सत्कार किया गया।

महंत श्री श्याम सुंदर दास जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि मनुष्य को गौमाता की सेवा करनी चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं प्रतिदिन गौमाता को चराने के लिए जंगल में जाया करते थे। गौमाता की सेवा तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं की सेवा के समान है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गाय को दुख पहुंचाता है, वह पाप का भागी बनता है और उसे उस पाप का फल भोगना पड़ता है।

महंत ने कहा कि गाय का दूध निकालने के बाद उसे सड़क पर नहीं छोड़ना चाहिए और न ही गौमाता को प्रताड़ित करना चाहिए। गौमाता की सेवा को परम सेवा बताते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं से गायों की सेवा करने और उनके प्रति संवेदनशील रहने का संदेश दिया।

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