भीलवाड़ा, 15 अक्टूबर। मतदाता सूची से नाम विलोपन और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया में भारत निर्वाचन आयोग ने व्यक्तिगत निर्वाचकों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले फॉर्म-7 को लेकर नए दिशा-निर्देश और सीमाएं निर्धारित की हैं। बिना ठोस आधार के थोक में आपत्ति फॉर्म प्रस्तुत किए जाने के मामलों को आयोग ने संज्ञान में लिया है। ऐसे मामलों से वास्तविक मतदाताओं के साथ-साथ चुनाव प्रक्रिया से जुड़े फील्ड स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों को भी अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, व्यक्तिगत निर्वाचकों द्वारा बिना किसी ठोस आधार के बड़ी संख्या में आपत्ति फॉर्म प्रस्तुत किए जाने से मतदाता सूची से संबंधित कार्य प्रभावित होते हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए फॉर्म-7 के संबंध में नए दिशा-निर्देश एवं सीमाएं निर्धारित की गई हैं। इनका उद्देश्य मतदाता सूची से नाम विलोपन अथवा आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित करना है।

उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं अतिरिक्त जिला कलक्टर डॉ. हरीतिमा ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग के प्रासंगिक पत्र के साथ प्राप्त भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों की प्रति संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ सभी सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ), बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) और अन्य फील्ड स्तरीय कार्यकर्ताओं को नए नियमों एवं दिशा-निर्देशों से तत्काल अवगत कराएं।

इसके साथ ही आमजन के बीच इन दिशा-निर्देशों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि नागरिकों को फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाता सूची से नाम हटाने अथवा आपत्ति दर्ज कराने के लिए निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

भारत निर्वाचन आयोग के नए दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन और आमजन तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे मतदाता सूची से जुड़े कार्यों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

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