तस्वीर में कांग्रेस पार्टी का चुनाव चिन्ह (हाथ का पंजा) दिख रहा है, जो तिरंगे के रंगों वाले पृष्ठभूमि में है।

गंगापुर नगरपालिका चुनाव के बीच कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। टिकट के दावेदारों के बीच चल रही रस्साकशी के बीच कांग्रेस विधानसभा प्रत्याशी राजेंद्र त्रिवेदी और नगर अध्यक्ष धीरज चंदेल कार्यकर्ताओं से रायशुमारी कर संभावित प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा कर रहे हैं।

रायशुमारी के दौरान कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की और दो वार्डों को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं। कार्यकर्ताओं ने पिछली बोर्ड में पार्षद रहे कुछ लोगों को दोबारा टिकट नहीं देने की मांग उठाई। उनका आरोप है कि पिछले पांच वर्षों में इन लोगों ने कांग्रेस बोर्ड के चेयरमैन का साथ देने के बजाय लगातार विरोध किया और पार्टी हितों के विपरीत काम किया।

कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेताओं के सामने ऐसे कथित ‘बिकाऊ’ लोगों का कच्चा चिट्ठा भी रखने का दावा किया, जिन्हें लेकर संगठन के भीतर लंबे समय से नाराजगी बताई जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव के समय पार्टी के साथ खड़े रहने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर यदि ऐसे चेहरों को टिकट दिया गया तो इसका सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।

रायशुमारी में शामिल कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के एक धड़े पर कथित रूप से विवादित और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे लोगों को टिकट दिलाने की पैरवी करने का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि टिकट वितरण में स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय और जमीनी फीडबैक को नजरअंदाज किया गया तो पार्टी को चुनाव में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व से मांग की कि टिकट वितरण में किसी व्यक्ति विशेष की पैरवी या दबाव के बजाय वार्ड में सक्रियता, जनता के बीच पकड़, संगठन के प्रति निष्ठा और पिछले कार्यकाल के प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि चुनाव में जीतने की क्षमता रखने वाले साफ-सुथरे और सक्रिय कार्यकर्ताओं को ही मैदान में उतारा जाना चाहिए।

रायशुमारी के दौरान कार्यकर्ताओं ने खुली चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यदि कथित तौर पर ‘बिकाऊ’ छवि वाले लोगों को टिकट दिया गया तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है और कांग्रेस को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है। कुछ कार्यकर्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे लोगों को टिकट मिला तो कांग्रेस की हार भी निश्चित मानी जाएगी।

गंगापुर नगरपालिका चुनाव में टिकट वितरण अब कांग्रेस के लिए महज प्रत्याशी चयन का मामला नहीं रह गया है। यह संगठन के भीतर पुराने कार्यकर्ताओं और अलग-अलग धड़ों के बीच शक्ति संतुलन की परीक्षा भी बनता दिखाई दे रहा है। अब सबकी नजरें पार्टी नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं कि टिकट वितरण में कार्यकर्ताओं की राय को कितना महत्व दिया जाता है और पार्टी अंदरूनी असंतोष को किस तरह साधती है।

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