तस्वीर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का आधिकारिक चुनाव चिन्ह (कमल का फूल) नारंगी पृष्ठभूमि के साथ दिख रहा है।

गंगापुर, भीलवाड़ा। गंगापुर नगरपालिका चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भाजपा के भीतर रस्साकशी चरम पर पहुंच गई है। पिछले तीन वर्षों तक साथ रहे कार्यकर्ताओं को टिकट वितरण के ऐन वक्त पर किनारे किए जाने की चर्चाओं ने पार्टी की अंदरूनी सियासत में बेचैनी बढ़ा दी है। ऐसे में ‘तेरे कूचे में रहकर हुए बेआबरू’ वाली कहावत भाजपा की मौजूदा स्थिति पर सटीक बैठती नजर आ रही है।

गंगापुर में टिकटों को लेकर भाजपा के दो अलग-अलग कार्यालयों में मंथन का दौर जारी है। दोनों खेमों की सक्रियता के बीच संभावित दावेदारों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं और वार्ड टिकटों के समीकरण लगातार बदलते नजर आ रहे हैं। जिस सियासी बिसात को अब तक एक रणनीति के तहत तैयार किया गया था, उसी पर टिकट वितरण के समय समीकरण बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं।

नगरपालिका चुनाव में नई भाजपा किस रुख के साथ मैदान में उतरेगी, इसकी तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। दूसरी ओर, पुरानी भाजपा के सक्रिय होने से नई भाजपा खेमे में भी बेचैनी बढ़ने की चर्चा है। लंबे समय से किनारे किए गए पुराने कार्यकर्ताओं की अचानक बढ़ी सक्रियता ने टिकट वितरण की रणनीति को और उलझा दिया है।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि अब तक वादा करके मुकरने के लिए चर्चित रहे ‘माननीय’ पर पुरानी भाजपा की टीम भी पूरी तरह भरोसा नहीं कर पा रही है। पुराने कार्यकर्ताओं को आशंका है कि चुनाव के दौरान यदि उन्हें साथ लिया गया तो चुनाव के बाद फिर वही उपेक्षा और दूरी का दौर शुरू हो सकता है।

ऐसे में टिकट वितरण अब केवल वार्ड उम्मीदवार तय करने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भाजपा के भीतर वर्चस्व और राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई का रूप लेता नजर आ रहा है। पुरानी भाजपा अपने सम्मान और भविष्य को लेकर चिंतित है, वहीं नई भाजपा के सामने संगठन को साधने और चुनावी रणनीति को बचाए रखने की चुनौती खड़ी है।

अब सभी की नजर टिकटों की अंतिम सूची पर टिकी है। किसे टिकट मिलता है और किसे बाहर का रास्ता दिखाया जाता है, इसी से गंगापुर भाजपा की अंदरूनी सियासत की अगली तस्वीर साफ होगी। फिलहाल दो कार्यालयों में चल रहा मंथन और पर्दे के पीछे जारी सियासी उठापटक ने गंगापुर नगरपालिका चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है।

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