चेहते नहीं, प्रतिभा का हो चयन: स्कूली खेलों में पारदर्शिता की मांग, लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी ने उठाई आवाज
भीलवाड़ा में लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी ने स्कूली खेलों में पारदर्शी चयन की मांग की। वीडियोग्राफी, स्पष्ट मानदंड और निष्पक्ष अपील व्यवस्था के साथ खिलाड़ियों को समान अवसर देने की मांग जिला प्रशासन से की गई।
तस्वीर में लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी के अध्यक्ष अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह राठौड़ भीलवाड़ा में नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा में स्कूली खेल-कूद प्रतियोगिताओं की चयन प्रक्रिया को लेकर लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी ने पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग उठाई है। एकेडमी ने जिला कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी से आगामी स्कूली खेल प्रतियोगिताओं में ऐसी चयन व्यवस्था लागू करने का आग्रह किया है, जिसमें प्रत्येक खिलाड़ी को समान अवसर मिले और किसी प्रतिभाशाली विद्यार्थी के साथ अन्याय की संभावना समाप्त हो।
लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी के अध्यक्ष अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने कहा कि स्कूली खेल-कूद प्रतियोगिताएं केवल जीत और हार का विषय नहीं हैं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की प्रतिभा, मेहनत, आत्मविश्वास और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मंच हैं। ऐसे में चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
अधिवक्ता राठौड़ ने कहा कि खिलाड़ी कई महीनों तक मेहनत करते हैं। सुबह जल्दी उठकर अभ्यास करने वाले विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों की उम्मीदें भी जुड़ी होती हैं। ऐसे में यदि केवल दो-तीन दिन के प्रदर्शन के आधार पर किसी खिलाड़ी के भविष्य का निर्णय किया जाता है तो यह हमेशा न्यायसंगत नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि खराब मौसम, चोट, मैदान की स्थिति, मानसिक दबाव या अन्य परिस्थितियों के कारण कोई खिलाड़ी उस दिन अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाए तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उसकी प्रतिभा कम है। खिलाड़ी का मूल्यांकन उसके निरंतर प्रदर्शन, तकनीकी कौशल, फिटनेस, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण के आधार पर भी किया जाना चाहिए।
लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी ने चयन प्रक्रिया में वीडियोग्राफी को अनिवार्य करने, चयन के स्पष्ट मानदंड पहले से घोषित करने, योग्य तकनीकी विशेषज्ञों को चयन समिति में शामिल करने, हितों के टकराव से बचने तथा शिकायत एवं अपील की निष्पक्ष व्यवस्था बनाने की मांग की है।
अधिवक्ता राठौड़ ने कहा कि चयन प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिस पर खिलाड़ी, अभिभावक और शिक्षा विभाग सभी विश्वास कर सकें। कैमरे के सामने होने वाला निष्पक्ष निर्णय न केवल खिलाड़ियों को भरोसा देगा, बल्कि ईमानदारी से कार्य करने वाले चयनकर्ताओं को भी अनावश्यक आरोपों से बचाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन शारीरिक शिक्षकों, निर्णायकों और कर्मचारियों की प्रतियोगिताओं में ड्यूटी लगाई जाती है, उनकी वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए। ड्यूटी केवल आदेश पत्र तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि मैदान पर दिखाई देनी चाहिए।
लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी ने ग्रामीण और छोटे विद्यालयों के खिलाड़ियों को भी समान अवसर देने की मांग की है। एकेडमी का कहना है कि प्रतिभा केवल बड़े विद्यालयों और शहरों तक सीमित नहीं है। गांवों में भी अनेक खिलाड़ी ऐसे हैं, जिनमें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की क्षमता है।
अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध नहीं है, बल्कि खेल व्यवस्था को मजबूत और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से है। उन्होंने कहा, ’’खिलाड़ी किसी का चहेता नहीं, देश की प्रतिभा है। मैदान किसी की जागीर नहीं, प्रतिभा की परीक्षा है। चयन किसी की कृपा नहीं, योग्यता का सम्मान है।’’
उन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि खेल प्रतियोगिताओं से पूर्व स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि निष्पक्ष चयन, पारदर्शी व्यवस्था और खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी सुनिश्चित हो सके। निष्पक्ष खेल, निष्पक्ष चयन और पारदर्शी व्यवस्था ही वास्तविक खेल भावना की पहचान है।