तस्वीर में माणिक्यनगर रामद्वारा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बैठे संत स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज और कथा में उपस्थित श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।

भीलवाड़ा, 16 सितंबर। माणिक्यनगर रामद्वारा में ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत आयोजित विराट श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के तीसरे दिन बुधवार को अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने सद्गुरु और संत की शरण को जीवन के पाप, ताप एवं संताप से मुक्ति का मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि अन्न का नहीं मिलना क्षणिक ताप होता है, जल और वायु नहीं मिलना भी ताप है, लेकिन जन्म-मरण का जारी रहना सबसे बड़ा ताप है। संत-महात्मा अपने धर्म और तप बल से भक्त को ताप एवं संताप से मुक्ति प्रदान करते हैं तथा अपनी साधना से जीवन में शीतलता लाते हैं।

आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने वाणीजी प्रवचन में कहा कि गंगा पाप का और चंद्रमा ताप का हरण करता है, लेकिन सारे पापों और तापों का शमन करने का सामर्थ्य सद्गुरु के पास होता है। सद्गुरु और संत की शरण में जाने से सारे पाप, ताप और संताप मिट जाते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वामी रामचरण महाराज कहते थे कि अमृत पाने के लिए भटकने की जरूरत नहीं है। सद्गुरु की कृपा होने पर अमृत उन्हीं के पास मिलेगा। स्वामी रामचरण महाराज कहते थे कि यह संसार रूपी समुद्र खारे जल के समान है और संसार के भोग भी खारे हैं। जो इन्हें मीठा समझकर भोगता है, वह अपना जीवन स्वयं बर्बाद कर लेता है। संत ही शिष्य के गुण और व्यक्तित्व को निखारता है तथा अपनी तपस्या के बल पर सबका कल्याण करता है।

आचार्यश्री ने कहा कि चंद्रमा पर कलंक और समुद्र में खारापन है। इस संसार में एक-एक अवगुण सभी में है, लेकिन जो राम नाम से प्यार करता है, वह संसार में सर्वश्रेष्ठ है। संसार में कोई बड़ा नहीं, सबसे बड़ा हरि का नाम है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत में हरि शब्द का उपयोग किया गया है। योगेश्वर कृष्ण अर्जुन को निमित्त बनाकर जगत की आंखें खोलते हैं। जीवन के अंत समय में जो श्रद्धा से राम नाम का स्मरण करता रहता है, वह राम को प्राप्त हो जाता है।

आचार्यश्री ने बताया कि गुरुवार को रामस्नेही संप्रदाय के महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज का विराट दीक्षा पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर छप्पन भोग लगाया जाएगा। श्रद्धालु अपने-अपने घर से पकवानों की थाली तैयार करके लाएंगे और कार्यकर्ता उनसे लेकर चढ़ाएंगे। आचार्यश्री ने कहा कि जब सैकड़ों घरों से अलग-अलग पकवान आएंगे तो छप्पन भोग नहीं, अनंत पकवान और अनंत व्यंजन हो जाएंगे।

श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के चौथे दिन व्यास पीठ से संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना ने विभिन्न प्रसंगों का वाचन किया। इससे पूर्व श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करते हुए उन्होंने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नृसिंह अवतार, अमृत मंथन और वामन अवतार सहित विभिन्न प्रसंगों की चर्चा की।

संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना ने कहा कि कथा श्रवण करना भक्ति है और यदि श्रवण ठीक से हो गया तो भक्ति हृदय में विराजित हो जाएगी तथा ज्ञान भी मन में आ जाएगा। भगवान की कथा पूर्ण आदर एवं समर्पण भाव से श्रवण करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राम नाम जपने में हमारा मन नहीं लगता और भजन करते समय भी संसार की बातें याद आती हैं। जिसका मन माला जपने में लग गया, उसका जीवन धन्य हो जाएगा। भागवत कथा में यदि भक्ति जागृत हो जाए तो वह पुण्य मिलेगा, जो तपस्या, तीर्थ और अनुष्ठान करने पर भी नहीं मिल सकता। गीता में कृष्ण कहते हैं कि जो तत्वों का अनुभव कर लेता है, वह मेरा भी अनुभव कर मानव देह में ही परमात्मा को प्राप्त कर सकता है।

संत मनोरथराम ने हरि नाम की महिमा बताते हुए कहा कि भक्त प्रहलाद द्वारा हरि नाम सुमिरन करने से हिरण्यकश्यप की पूरी सरकार हिल गई। उसने खूब प्रयास किए, लेकिन हरि भक्त प्रहलाद का बाल भी बांका नहीं हुआ। उसे जलाने के लिए अग्नि स्नान में बैठी बुआ होलिका स्वयं जलकर खाक हो गई। यह प्रभु भक्ति का क्या परिणाम होता है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। हिरण्यकश्यप का अंत करने के लिए खंभा फाड़कर नृसिंह भगवान प्रकट हुए।

उन्होंने कहा कि भक्ति का यही करिश्मा है कि वानर, बालक, स्त्री, अभागा और अनाथ, जो भी हरि नाम जपता है, वह बलशाली और भाग्यशाली होकर हर मुसीबत का सामना कर सकता है। भजन और सत्संग में अद्भुत शक्ति होती है।

श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कई भजनों ने वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। श्रीमद् भागवत कथा में पांचवें दिन गुरुवार को कृष्ण जन्म प्रसंग का वाचन होगा। चातुर्मास आयोजन समिति के अनुसार 20 सितंबर तक चलने वाले श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा होगी। सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम को 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा। आयोजन में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भीलवाड़ा पहुंचे हैं और प्रतिदिन कथा श्रवण का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के तहत पुष्कर से आए विद्वान पंडितों द्वारा रामद्वारा परिसर में 108 भागवत का मूल पाठ किया जा रहा है। सुबह पाठ प्रारंभ करने से पूर्व 108 यजमान परिवारों द्वारा इनका पूजन किया जा रहा है। पूजा-अर्चना के बाद विद्वान भागवत का मूल पाठ प्रारंभ करते हैं तो पूरा वातावरण मंत्रों से पावन एवं पवित्र हो जाता है। जहां मूल भागवत पाठ चल रहा है, उस पावन नजारे का बाहर से ही सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन करते हैं।

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