तस्वीर में भीलवाड़ा मुठभेड़ मामले की शिकायत लेकर पहुंचे मृतक के परिजन और ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर दस्तावेज दिखाते हुए नजर आ रहे हैं।

भीलवाड़ा के पुर थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे नंबर 48 पर हुई कथित मुठभेड़ का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पुलिस की ओर से पेश की गई मुठभेड़ की कहानी पर सवाल उठाते हुए मृतक के परिजनों ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के पुलिसकर्मियों पर फर्जी मुठभेड़ दिखाकर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में मृतक के चचेरे भाई ने भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता रामपाल पुत्र तेजाराम, उम्र 32 वर्ष, निवासी रामडवास, थाना डांगीयावास, जिला जोधपुर ग्रामीण, जो मृतक गणपत राम का चचेरा भाई है, ने पुलिस अधीक्षक भीलवाड़ा को लिखित रिपोर्ट देकर आरोप लगाया है कि 05 अगस्त 2026 की रात्रि को गणपत राम (36) पुत्र आलाराम, निवासी रामडवास, थाना डांगीयावास, जिला जोधपुर ग्रामीण तथा महेन्द्र पुत्र दीपाराम गोदारा, निवासी सोपड़ा (भोपालगढ़), जिला जोधपुर, स्विफ्ट कार से चित्तौड़गढ़ की ओर से आ रहे थे।

शिकायत के अनुसार, भीलवाड़ा के पुर थाना क्षेत्र में एनएच-48 पर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) भीलवाड़ा के पुलिसकर्मियों ने नाकाबंदी कर रखी थी। आरोप है कि पुलिस ने स्पाइक स्ट्रिप (लोहे की कीलें) बिछाकर कार के दोनों टायर पंक्चर कर दिए, जिसके बाद गणपत राम ने वाहन रोक दिया। शिकायतकर्ता का दावा है कि न तो गणपत राम के पास कोई हथियार था और न ही उनकी ओर से किसी प्रकार की फायरिंग की गई। इसके बावजूद पुलिसकर्मी ने हत्या की नीयत से सरकारी पिस्तौल से सीधे गणपत राम के सीने में गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

रामपाल ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि घटना के बाद पुलिसकर्मी साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। शिकायत के अनुसार, मृतक के साथ मौजूद महेन्द्र को घटना की रात से ही पुलिस ने अवैध हिरासत में रखा हुआ है और किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा। आरोप लगाया गया है कि महेन्द्र पर पुलिस के पक्ष में झूठे बयान देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है तथा उसे डरा-धमकाया जा रहा है।

शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि उन्होंने इस मामले में पुर थानाधिकारी को रिपोर्ट देकर शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि मृतक गणपत राम का सगा भाई मोटा राम भारतीय सेना में सेवारत है। उनके आने में देरी होने के कारण चचेरे भाई रामपाल ने स्वयं पुलिस अधीक्षक को यह शिकायत प्रस्तुत की।

पुलिस अधीक्षक को दिए गए ज्ञापन में मांग की गई है कि एएनटीएफ भीलवाड़ा के संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ हत्या का आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। इसके साथ ही घटना स्थल के आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग तत्काल सुरक्षित कर साक्ष्य के रूप में जब्त की जाए। शिकायत में यह भी मांग की गई है कि साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए मृतक गणपत राम के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड से कराया जाए।

मामले में परिजनों द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। शिकायत के बाद मामले में निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है और पुलिस महकमे में भी इस घटनाक्रम को लेकर हलचल बढ़ गई है।

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