भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज में प्रथम वर्ष के एमबीबीएस विद्यार्थियों के साथ कथित रैगिंग, धमकियों और शैक्षणिक भविष्य खराब करने की चेतावनी देने का मामला सामने आने के बाद राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने कॉलेज प्रशासन को 24 घंटे के भीतर बिंदुवार जवाब, अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट और मामले से संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने 15 अक्टूबर को ऑक्सटेल हॉस्टल में हुई कथित घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया है। आरोप है कि प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को धमकाया गया और एक समूह के जरिए उन्हें डराया गया। शिकायत में विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी डराने और शैक्षणिक प्रताड़ना की धमकी देने के आरोप शामिल हैं।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की एंटी-रैगिंग सेल ने 16 अक्टूबर को कॉलेज के डीन/प्राचार्य को ईमेल भेजकर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायत पर की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा और प्रत्येक बिंदु पर कॉलेज प्रशासन की टिप्पणी मांगी है।

इस संस्थान से पहले भी रैगिंग की शिकायतें मिलने का उल्लेख करते हुए आयोग ने अपने पत्र में बताया कि कुछ महीने पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे। उस समय कॉलेज प्रशासन को रैगिंग के प्रति ‘शून्य सहनशीलता’ (Zero Tolerance) की नीति अपनाने की सलाह दी गई थी। ताजा शिकायत के बाद आयोग ने पहले जारी किए गए निर्देशों की पालना पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और 9 मार्च 2026 के एनएमसी सार्वजनिक नोटिस का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि रैगिंग रोकना संस्थान प्रमुख की मुख्य जिम्मेदारी है। इसके साथ ही कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी, स्क्वॉड और हॉस्टल कमेटी की भूमिका तथा उनके कामकाज की समीक्षा की आवश्यकता भी जताई गई है।

एनएमसी ने मामले से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि जांच के दौरान संबंधित साक्ष्यों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। आयोग ने शिकायत पर अब तक की गई कार्रवाई का विवरण और सभी बिंदुओं पर जवाब तत्काल प्रस्तुत करने को कहा है।

फिलहाल भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। कॉलेज की रिपोर्ट, उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्षों के बाद ही कथित रैगिंग, धमकियों और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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