आचार्य रामदयालजी महाराज का संदेश, सत्ता-संपत्ति नहीं परमात्मा का दीदार हो साधना का लक्ष्य
भीलवाड़ा में अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के आचार्य रामदयालजी महाराज ने साधना का लक्ष्य परमात्मा का दीदार बताया। ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के सत्संग में भक्ति, आत्मसंयम और आंतरिक विकारों पर विचार रखे तथा सेवाभावी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया।
भीलवाड़ा में आयोजित चातुर्मास कार्यक्रम के दौरान रामस्नेही संप्रदाय के आचार्य रामदयालजी महाराज की उपस्थिति में सराहनीय कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया।
भीलवाड़ा, 18 अक्टूबर। जीवन की साधना का लक्ष्य सत्ता, शक्ति, संपत्ति और सौंदर्य हासिल करना नहीं, बल्कि इन सबका निर्माण करने वाले परमात्मा राम का दीदार करना होना चाहिए। सद्गुरु के चरणों में बैठने से ही मन को शांति प्राप्त होती है। यह विचार अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने रविवार को ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत आयोजित दैनिक सत्संग में व्यक्त किए। इस अवसर पर उन्होंने साधना, भक्ति और आत्मसंयम के महत्व पर प्रकाश डालने के साथ चातुर्मास को सफल बनाने में सराहनीय सेवाएं देने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि उपासना, वासना, साधना और आराधना जीव के अंतःसंकल्प पर निर्भर करती हैं। साधना का संकल्प जीवन को ऊंचाइयों की ओर ले जाता है। संतों के मन की वृत्ति अतीत, वर्तमान और भविष्य में भी राम नाम में ही रहती है। श्रेष्ठ पद और परम पद प्राप्त करना है तो एक नाम राम की साधना करनी ही होगी।
सत्संग में आचार्यश्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय भक्ति की इसी परंपरा का धनी है। सनातन काल से महापुरुषों ने समाज को भक्ति के गंभीर और मार्मिक मार्ग पर चलने का मार्गदर्शन दिया है। यही कारण है कि महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के सांसों की सत्ता के अस्तित्वकाल में असंख्य भक्तों ने संयम और शीलव्रत का संकल्प लेकर भोगवाद से मुक्ति प्राप्त की और योगवाद का मार्ग अपनाकर सिद्धि के शिखर को छुआ। उन्होंने कहा कि स्वामी रामचरणजी महाराज के शरीर त्यागने के बाद भी उनकी तपस्या के प्रताप से अनेक लोगों ने शीलव्रत धारण कर भोगों से मुक्ति पाई और अपने जीवन को धन्य बनाया।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि व्यक्ति के लिए बाहरी आतंकवाद का खतरा उतना बड़ा नहीं है, जितना भीतर मौजूद काम, क्रोध, लोभ, मोह और मद रूपी आतंकवाद का खतरा उसे व्यथित करता है। जीवन क्षणभंगुर है और इस नश्वर काया का एक पल का भी भरोसा नहीं है। जब काल का तांडव होता है, तब केवल महाकाल हंसते हैं।
उन्होंने कलकत्ता में दुर्गा पंडाल में हुई भगदड़ और अफरातफरी तथा ग्वालियर में तेज गति से चल रहे ट्रक द्वारा कई श्रद्धालुओं को कुचल देने जैसी घटनाओं में मृत्यु का शिकार हुए लोगों के प्रति भावांजलि अर्पित की। साथ ही परमात्मा से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की और इन हादसों में घायल हुए लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
प्रवचन से पहले आचार्य रामदयालजी महाराज ने चातुर्मास को सफल बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय सेवाएं देने वाले कार्यकर्ताओं का चातुर्मास समिति की ओर से सम्मान किया और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यालय व्यवस्था में योगदान के लिए बद्रीनारायण लड्ढा, प्रहलादराय डाड, कैलाश दरगड़, बनवारीलाल सोमानी, रामप्रकाश सोमानी और चाहत सोमानी को सम्मानित किया गया।
पंडाल व्यवस्था के लिए अशोक लड्ढा और पुरुषोत्तम गगरानी, प्रसाद वितरण व्यवस्था के लिए जगदीश विजयवर्गीय, जगदीश लड्ढा, महेंद्र राठी और रामगोपाल राठी को सम्मान मिला। आरती-पूजा व्यवस्था के लिए दिनेश सोमानी और प्रमोद गंदोड़िया, भोजन निर्माण व्यवस्था के लिए पवन अजमेरा, राजेंद्र काबरा, चंद्रप्रकाश मूंदड़ा और मनोज मूंदड़ा का सम्मान किया गया।
आवास व्यवस्था में सेवाएं देने वाले रामनारायण लड्ढा, चाहत सोमानी, अभिषेक डाड, कृष्णकुमार विजयवर्गीय और चंद्रप्रकाश विजयवर्गीय को भी सम्मानित किया गया। रामद्वारा कार्यालय प्रभारी पारसमल पीपाड़ा, रमेश बाल्दी, लीला राठी और आशीष राठी सहित अन्य कार्यकर्ताओं को भी सम्मान प्रदान किया गया।
आचार्यश्री के प्रवचन से पहले अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के समापन पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
चातुर्मास के तहत प्रतिदिन सुबह 8.30 से 9 बजे तक रामधुनी के साथ वाणीजी का पाठ किया जा रहा है। दैनिक सत्संग सुबह 9 बजे से आयोजित हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती होती है। इसके साथ ही रामस्नेही संप्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।