सावन के पहले दिन पालने में मिला लावारिस नवजात, महात्मा गांधी अस्पताल में मिला नया नाम 'रुद्र'
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय के पालना गृह में सावन के पहले दिन एक लावारिस नवजात बालक मिला। बाल कल्याण समिति ने उसका नाम 'रुद्र' रखा, सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए और आगे अडॉप्शन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की। जानिए पूरी घटना और समिति की महत्वपूर्ण अपील।
तस्वीर में भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय के एनआईसीयू वार्ड में नवजात शिशु के पास अस्पताल के स्टाफ और बाल कल्याण समिति के सदस्य नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा। सावन के पवित्र महीने के पहले दिन, जब श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लीन थे, उसी दौरान महात्मा गांधी चिकित्सालय के पालना गृह में एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई। गुरुवार शाम पालना गृह की घंटी (सायरन) बजते ही अस्पताल का स्टाफ तत्काल वहां पहुंचा। पालने में एक नवजात बालक शांत अवस्था में लेटा मिला, जिसे किसी ने वहां छोड़ दिया था।
अस्पताल के मुस्तैद स्टाफ ने बिना समय गंवाए नवजात को अपनी देखरेख में लिया और तत्काल नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार शुरू किया गया।
चिकित्सकों के अनुसार नवजात का वजन 1.870 किलोग्राम है। जन्म देने वाली मां किसी मजबूरी के चलते उसे पालना गृह में छोड़ गई, लेकिन अस्पताल प्रशासन और बाल कल्याण समिति ने उसकी देखभाल की जिम्मेदारी संभाल ली है। प्राथमिक उपचार के बाद फिलहाल मासूम की स्थिति पूरी तरह स्थिर बताई गई है।
घटना की सूचना मिलते ही बाल कल्याण समिति के सदस्य विनोद राव तत्काल महात्मा गांधी चिकित्सालय पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी लेकर नवजात की स्थिति का जायजा लिया।
सावन माह के प्रथम दिन और गुरुवार को पालना गृह में मिले इस नवजात के जीवन और मंगल कामना को ध्यान में रखते हुए बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष श्रीमती चंद्रकला ओझा तथा सदस्य विनोद राव ने उसका काल्पनिक नाम "रुद्र" रखा।
बाल कल्याण समिति ने नवजात की सुरक्षा और सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रशासनिक कदम भी उठाए हैं। जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर NICU वार्ड के बाहर महिला पुलिस गार्ड की तैनाती कराई गई है। वहीं अस्पताल अधीक्षक को पत्र लिखकर 'रुद्र' के उपचार में विशेष ध्यान देने और उसकी देखभाल के लिए समर्पित 'यशोदा' नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
अस्पताल से पूरी तरह स्वस्थ होकर डिस्चार्ज होने के बाद 'रुद्र' को राजकीय शिशु गृह, पालड़ी (भीलवाड़ा) स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार उसके गोद लेने (अडॉप्शन) की कानूनी और पुनर्वास प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि उसे एक ऐसा परिवार मिल सके जो उसे अपनी संतान की तरह स्नेह और संरक्षण प्रदान करे।
बाल कल्याण समिति ने आमजन से भावुक अपील करते हुए कहा है, "यदि कोई परिवार या मां किसी भी विषम स्थिति के कारण अपने नवजात शिशु का पालन-पोषण करने में असमर्थ है, तो बच्चे को झाड़ियों, नालों या किसी असुरक्षित स्थान पर छोड़ने के बजाय पालना गृह में ही छोड़ें। भीलवाड़ा में महात्मा गांधी चिकित्सालय और राजकीय किशोर गृह (पालड़ी) में पालना गृह की सुविधा उपलब्ध है। आपका एक सही कदम हर 'रुद्र' को एक सुरक्षित और खुशहाल जीवन दे सकता है।"