भीलवाड़ा एनडीपीएस कोर्ट का बड़ा फैसला: मध्य प्रदेश के दो अफीम तस्करों को 15-15 साल की जेल

भीलवाड़ा की विशिष्ट एनडीपीएस अदालत ने 4 किलो 200 ग्राम अफीम बरामदगी से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश के दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 15-15 वर्ष के कठोर कारावास और 1.5-1.5 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जानिए अदालत ने किन साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला।

Update: 2026-07-31 12:00 GMT

तस्वीर में भीलवाड़ा में अफीम तस्करी के मामले के दो आरोपी पुलिसकर्मियों के साथ अदालत परिसर में खड़े नजर आ रहे हैं।

भीलवाड़ा में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ विशिष्ट न्यायाधीश (एनडीपीएस प्रकरण) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अफीम तस्करी के मामले में मध्य प्रदेश के दो तस्करों को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को 15-15 वर्ष के कठोर कारावास और 1.5-1.5 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

मामला 7 मार्च 2022 का है। तत्कालीन मंगरोप थानाधिकारी मोतीलाल पुलिस जाप्ते के साथ मण्डपिया पुलिस चौकी के सामने गश्त एवं नाकाबंदी कर रहे थे। इसी दौरान एक मोटरसाइकिल पर आ रहा चालक पुलिस को देखकर अचानक मुड़कर भागने का प्रयास करने लगा। संदेह होने पर पुलिस टीम ने उसे रोककर पूछताछ की।

पूछताछ में चालक ने अपना नाम चेनराम भील पुत्र मांगीलाल धुंदरावत, निवासी जीवा, थाना नीमच सिटी, मध्य प्रदेश बताया। इसके बाद पुलिस ने मोटरसाइकिल की डिग्गी की तलाशी ली, जिसमें से 4 किलोग्राम 200 ग्राम अवैध अफीम बरामद हुई।

पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी चेनराम ने खुलासा किया कि उसने यह अफीम परमानन्द जाट पुत्र मन्नाराम, निवासी बरखेड़ादेव, थाना मल्हारगढ़, मंदसौर, मध्य प्रदेश से खरीदी थी। इस खुलासे के बाद मंगरोप पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य सप्लायर परमानन्द को भी गिरफ्तार किया और दोनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया।

विशिष्ट लोक अभियोजक रामस्वरूप गुर्जर ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने आरोपियों को सख्त सजा दिलाने के लिए अदालत के समक्ष मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान 8 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए तथा 78 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए, जिनके आधार पर अभियोजन पक्ष ने अपना मामला साबित किया।

दोनों पक्षों की बहस और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद विशिष्ट न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट प्रकरण) ने मुख्य आरोपी चेनराम को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/18 के तहत दोषी पाया, जबकि सप्लायर परमानन्द को धारा 8/29 के तहत दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोनों आरोपियों की संगीन संलिप्तता को देखते हुए उन्हें 15-15 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 1.5-1.5 लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया।

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