अटल जी की यादें आज भी ताजा, गंगापुर के डाक बंगले में रुके थे अटल बिहारी वाजपेयी
गंगापुर के डाक बंगले में अटल बिहारी वाजपेयी के 1994 के प्रवास की यादें आज भी शहरवासियों के बीच जीवंत हैं।
तस्वीर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी गंगापुर के डाक बंगले में स्थानीय कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी के गंगापुर प्रवास की यादें आज भी शहरवासियों के जेहन में ताजा हैं। अपने राजनीतिक जीवन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी अल्प समय के लिए गंगापुर के डाक बंगले में रुके थे। इस दौरान उन्होंने शहरवासियों से आत्मीयता से मुलाकात की और शहर का हालचाल भी जाना।
बताया जाता है कि तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष अटल बिहारी वाजपेयी करीब आधे घंटे तक गंगापुर नगर के डाक बंगले में रुके थे। इस दौरान वे कार्यकर्ताओं एवं शहर के लोगों से बड़ी आत्मीयता से मिले। उनके सहज और सरल स्वभाव की यादें आज भी गंगापुरवासियों के बीच चर्चा का विषय हैं।
वाजपेयी के गंगापुर प्रवास के दौरान भाजपा नेता कैलाश महता ने उन्हें जूस पीने की मनुहार की। अटल जी ने मुस्कुराते हुए जूस पीने की इच्छा जताई। जब सुरक्षा कर्मियों ने जूस का टेस्ट करने के लिए कहा तो उन्होंने सहज भाव से कहा, “कार्यकर्ता पिला रहे हैं भाई, कुछ नहीं होगा।”
इस दौरान गंगापुर के वरिष्ठ नेता रहे स्व. सुंदरलाल महता, वरिष्ठ अधिवक्ता चांदमल सुखलेचा, स्व. बद्रीलाल लाल जाट, कैलाश महता, जगदीश चंद व्यास, अरविंद त्रिपाठी, सुभाष माली, विजय चौहान सहित कई लोग अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मौजूद रहे और उनके साथ फोटो भी खिंचवाई।
बताया गया कि अटल बिहारी वाजपेयी के साथ नई दिल्ली से देश के जाने-माने पत्रकार एवं जनसत्ता के संपादक रहे प्रभाष जोशी भी आए थे। 16 अप्रैल 1994 को अटल बिहारी वाजपेयी उदयपुर एयरपोर्ट से भीलवाड़ा में राजस्थान पत्रकार संघ (जार) के प्रदेश सम्मेलन में भाग लेने जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने गंगापुर सहित 12 गांवों के बारे में जानकारी लेने के बाद गंगापुर में रुकने की इच्छा जताई।
संयोग से जिस डाक बंगले में अटल बिहारी वाजपेयी ने करीब आधे घंटे का समय बिताया था, वह डाक बंगला सिंधिया राजघराने के महाराज के गंगापुर आगमन के सम्मान में निर्मित करवाया गया था।
आज जब गंगापुरवासियों को अटल बिहारी वाजपेयी के दुखद निधन की याद आती है तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं। उनके सरल स्वभाव, आत्मीय व्यवहार और गंगापुर प्रवास की यादें शहरवासियों के बीच आज भी जीवंत हैं।