आचार्य रामदयालजी महाराज बोले- प्रतिज्ञा नहीं, सच्चे मन की प्रार्थना हमेशा होती है पूरी
भीलवाड़ा रामद्वारा में आचार्य रामदयालजी महाराज ने प्रार्थना का महत्व बताया, वहीं 13 से 20 सितम्बर तक 108 वाणी और भागवत पाठ होंगे।
तस्वीर में भीलवाड़ा के रामद्वारा में सत्संग देते आचार्य श्रीरामदयालजी महाराज और बैठे श्रद्धालु दिख रहे हैं।
भीलवाड़ा में अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि जीवन में हर प्रतिज्ञा पूरी नहीं होती, लेकिन सच्चे मन से की गई प्रार्थना साकार होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रतिज्ञा के बजाय परमात्मा से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा कि अंतःकरण से की गई प्रार्थना में इतना बल होता है कि वह मनोरथों को पूर्ण कर सकती है।
आचार्य श्रीरामदयालजी महाराज ने यह विचार मंगलवार को माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत आयोजित दैनिक सत्संग में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रार्थना हर कोई कर सकता है, लेकिन प्रतिज्ञा करना सहज नहीं होता। प्रतिज्ञा कई बार कर ली जाती है, लेकिन उसे पूरा करना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए जीवन में प्रतिज्ञा से अधिक महत्व प्रार्थना का होता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भीष्म पितामह ने आजीवन विवाह नहीं करने और स्त्री पर शस्त्र नहीं उठाने की प्रतिज्ञा ली थी, जबकि महाभारत युद्ध में माधव कृष्ण ने शस्त्र हाथ में नहीं लेने की प्रतिज्ञा ली थी। इन प्रतिज्ञाओं को पूरा करना आसान नहीं था। आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में कोई भी प्रतिज्ञा सोच-समझकर करनी चाहिए, क्योंकि प्रतिज्ञा करना सहज है, लेकिन उसे निभाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में भक्ति करना कोई साधारण कार्य नहीं है। परमात्मा की भक्ति वही कर सकता है, जो शेरदिल होता है। जो कायर और डरपोक होता है, वह भक्ति नहीं कर सकता। भक्त परमात्मा की भक्ति में इतना तल्लीन हो जाता है कि उसे कौन क्या कह रहा है, इसकी कोई परवाह नहीं होती। उन्होंने कहा कि राम के प्रति हमारी भक्ति में दृढ़ता होनी चाहिए। भक्ति की दृढ़ता को साधना में प्रतिज्ञा नाम दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि भगवान की लीला में सुख होता है, लेकिन जीव जो क्रिया करता है, वह दुःख का कारण होती है। इसलिए परमात्मा की तरह क्रियाएं करना नहीं, बल्कि उनकी भक्ति और आराधना करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। जो स्वयं को भक्तिभाव से परमात्मा के चरणों में समर्पित कर देता है, उस पर परमात्मा की कृपा हो जाती है।
सत्संग में बताया गया कि स्वामी रामचरणजी महाराज की पावन भूमि पर उनकी कृपा से विश्व शांति चातुर्मास समिति द्वारा विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से चातुर्मास के दौरान 13 से 20 सितम्बर तक आचार्य रामदयालजी महाराज के सानिध्य में श्रीमद् भागवत एवं वाणीजी प्रवचन सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान 108 वाणी पाठ एवं 108 भागवत मूल पाठ का ऐतिहासिक विराट आयोजन होगा।
आयोजन में 108 वाणी पाठक बैठेंगे और निरंतर वाणी पाठ करेंगे। इसी तरह पुष्कर से आए 108 विद्वान भागवत का मूल पाठ करेंगे। इन 108 भागवत का पूजन 108 यजमान करेंगे। सप्ताह के दौरान प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा होगी। सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम को 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा।
श्रीवाणीजी का प्रवचन आचार्य श्रीरामदयालजी महाराज के मुखारबिंद से होगा, जबकि श्रीमद् भागवत कथा का वाचन संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना द्वारा किया जाएगा। भागवत पूजन के लिए यजमान बनने के इच्छुक श्रद्धालु तथा वाणीजी का पाठ करने वाले श्रद्धालु चातुर्मास समिति से संपर्क कर सकते हैं।
आचार्यश्री से पूर्व अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
रामद्वारा धाम में प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती के साथ रामस्नेही संप्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा भी सुनाई जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
भीलवाड़ा में इस वर्ष बारिश बहुत कम होने के कारण परमात्मा की कृपा और अच्छी बारिश की कामना से आचार्य रामदयालजी महाराज के सानिध्य में रामद्वारा में भजनों के माध्यम से प्रार्थना का दौर भी शुरू हो गया है। अच्छी बारिश की कामना से सुबह 5 से 6 बजे तक, दोपहर 3 से 5 बजे तक एवं शाम को संध्या आरती के बाद 7 से 8 बजे तक भजन हो रहे हैं। श्रद्धालु भजनों के माध्यम से भगवान से मेघों की कृपा कराने की प्रार्थना कर रहे हैं। भजनों का यह दौर तब तक चलेगा, जब तक अच्छी बारिश नहीं हो जाती है।