तस्वीर में रामदयालजी महाराज और सत्संग में बैठी महिला श्रद्धालु नजर आ रही हैं।

जीवन में भजन करने का सौभाग्य हर किसी को प्राप्त नहीं होता। राम गुरु की कृपा के बिना कोई भजन नहीं कर सकता। अज्ञानवाद, अहंकारवाद एवं अर्थवाद के अलावा ऐसा कोई कारण नहीं है, जो मनुष्य को भजन करने से रोक सके। सकारात्मक सोच व्यक्ति को व्यक्तिवाद से समष्टिवाद की ओर ले जाती है, जबकि नकारात्मक सोच स्वयं के संकल्प से भी दूर कर देती है। जीवन में विचारधारा हमेशा सकारात्मक होनी चाहिए। यह विचार अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगतगुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत बुधवार को दैनिक सत्संग में व्यक्त किए।

आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि हमेशा खुद को सही और दूसरों को गलत मानने की प्रवृत्ति ही संघर्षों का मूल कारण है। जिसने हमें सुनाने की ताकत दी, उस परमात्मा को भी हम सुनाते हैं। हम दुनिया को भजन सुनाने वाला बनना चाहते हैं, लेकिन परमात्मा को नहीं सुनाना चाहते। जिस दिन हमारे दिल से प्रेम के साथ गाया गया भजन परमात्मा को सुना देंगे, उस दिन दुनिया हाथ जोड़कर सुनने के लिए दरवाजे पर खड़ी होगी।

उन्होंने कहा कि भगवान के भजन के लिए राग नहीं, अनुराग चाहिए। परमात्मा दिल से सुनते हैं और भजन भी दिल से बोला जाता है, राग कंठ से नहीं। परमात्मा ऐसे भजन हृदय एवं अंतर्मन से सुनते हैं। हम परमात्मा की कृपा की बजाय दुनिया की प्रशंसा और तारीफ चाहते हैं। साधक अपनी भक्ति के संकल्प से राम गुरु को प्राप्त कर सकता है। ऐसे साधक का लक्ष्य आत्मकल्याण होता है और वह संकल्प का धनी होता है।

आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि तिलक हमारी सनातन संस्कृति का परम तत्व है, लेकिन आजकल कई लोगों को तिलक लगाने में भी शर्म आती है। सिर पर तिलक हमारी सनातन संस्कृति की पहचान है। हमें अपनी संस्कृति पर गर्व होना चाहिए।

आचार्य रामदयालजी महाराज ने बताया कि स्वामी रामचरणजी महाराज की पावन भूमि पर उनकी कृपा से विश्व शांति चातुर्मास समिति की ओर से विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से चातुर्मास के दौरान 13 से 20 सितंबर तक श्रीमद् भागवत एवं वाणीजी प्रवचन सप्ताह का आयोजन होगा। इस दौरान 108 वाणी पाठ एवं 108 भागवत मूल पाठ का ऐतिहासिक विराट आयोजन होगा। इसमें 108 वाणी पाठक बैठेंगे और निरंतर वाणी पाठ करेंगे। इसी तरह पुष्कर से आने वाले 108 विद्वान भागवत का मूल पाठ करेंगे। इन 108 भागवत का पूजन 108 यजमान परिवार करेंगे।

प्रवचन सप्ताह के दौरान प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा होगी। सुबह 10.30 से 11.30 बजे तक एवं शाम 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा। वाणीजी का प्रवचन आचार्य श्री रामदयालजी महाराज के मुखारबिंद से होगा। श्रीमद् भागवत कथा का वाचन संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना द्वारा किया जाएगा। जो साधक वाणीजी का पाठ करना चाहते हैं या भागवत पूजन के लिए यजमान बनने के इच्छुक हैं, वे चातुर्मास समिति से संपर्क कर सकते हैं।

आचार्यश्री से पूर्व अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही संप्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। चातुर्मास के दौरान 13 से 20 सितंबर तक आयोजित होने वाला श्रीमद् भागवत एवं वाणीजी प्रवचन सप्ताह इसी धार्मिक आयोजन की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगा।

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