भुसावर में सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों का तर्पण, शनिश्चरी अमावस्या पर शनिदेव की विशेष पूजा
भुसावर में सर्वपितृ अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने पितरों का तर्पण, श्राद्ध और दान किया। शनिवार के संयोग पर शनिदेव मंदिरों में तेलाभिषेक और दीपदान हुआ।
तस्वीर में मंदिर में शनिदेव प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाते व्यक्ति नजर आ रहे हैं।
भरतपुर जिले के ऐतिहासिक भुसावर शहर सहित उपखंड मुख्यालय क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों में शनिवार, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष का समापन हुआ। शनिवार होने के कारण इस अवसर पर शनिश्चरी अमावस्या का भी संयोग रहा। श्रद्धालुओं ने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान किया, वहीं शनिदेव मंदिरों में पहुंचकर तेलाभिषेक, विशेष पूजा-अर्चना और दीपदान किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर ज्ञात और अज्ञात पितरों का स्मरण कर तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है। जिन परिजनों को अपने पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाता, वे इस दिन पितृ कार्य कर सकते हैं।
इस अवसर पर लोगों ने घरों में स्नान के बाद काले तिल, कुशा और जल से पितरों का तर्पण किया। पितरों के निमित्त भोजन करवाने के साथ सामर्थ्य के अनुसार अन्न और वस्त्र का दान भी किया गया। श्रद्धालुओं ने इन धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए पितरों का स्मरण किया।
शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या होने के कारण भुसावर में शनिदेव की पूजा-अर्चना के लिए भी श्रद्धालु विभिन्न मंदिरों में पहुंचे। कोठीवाले हनुमान जी मंदिर परिसर में स्थापित भगवान शनिदेव की प्रतिमा, कुण्डा वाले हनुमान जी महाराज मंदिर और बांके बिहारी कॉलोनी सहित अन्य शनिदेव मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन हुए।
श्रद्धालुओं ने विधि-विधानपूर्वक शनिदेव की प्रतिमा का तेल से अभिषेक किया और विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिरों में फूलबंगला झांकी सजाई गई तथा दीपदान किया गया। इस दौरान ढोलक, झांझ और मंजीरे की थाप पर भजन गाकर श्रद्धालुओं ने भगवान शनिदेव की आराधना की और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।
इस प्रकार भुसावर शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों के श्राद्ध, तर्पण और दान के साथ शनिश्चरी अमावस्या पर शनिदेव की पूजा-अर्चना के धार्मिक आयोजन संपन्न हुए।