पथैना की नारोली माइनर नहर की सफाई पर सवाल, ग्रामीणों ने ठेकेदार पर लगाए आरोप
पथैना की नारोली माइनर नहर की सफाई और मरम्मत पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए, ठेकेदार पर खानापूर्ति के आरोप लगाकर जांच की मांग की।
तस्वीर में भुसावर उपखंड के पथैना गांव में नारोली माइनर नहर की बदहाल स्थिति और दोनों ओर की पटरियों का कच्चा रास्ता दिखाई दे रहा है।
भुसावर उपखंड के गांव पथैना में खानपुर पथैना कैनाल से निकलने वाली नारोली माइनर नहर की मरम्मत, खुदाई और साफ-सफाई के कार्य को लेकर ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के ठेकेदार के खिलाफ विरोध जताया है। ग्रामीणों का आरोप है कि नहर की साफ-सफाई और मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। उन्होंने सिंचाई विभाग कुम्हेर खंड के अधिकारियों से नहर की साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य गुणवत्ता के साथ कराने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार भुसावर उपखंड में जयपुर के बैराठ से भरतपुर के कोहनी बंध की ओर जाने वाली बाणगंगा नदी से निकलने वाली खानपुर पथैना कैनाल से नारोली के लिए एक लिंक माइनर नहर जाती है। इस नारोली माइनर नहर की मरम्मत, खुदाई और साफ-सफाई का कार्य कुम्हेर सिंचाई खंड की ओर से कराया जा रहा है। सिंचाई विभाग की ओर से नहर की दोनों ओर की पटरियों की मरम्मत, खुदाई और साफ-सफाई के लिए करोड़ों रुपए की राशि स्वीकृत कर कार्य कराया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य करने वाली कार्यकारी एजेंसी के ठेकेदार की ओर से नारोली माइनर नहर की साफ-सफाई और मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। इसे लेकर गांव पथैना के ग्रामीणों में विरोध है। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग कुम्हेर खंड के अधिकारियों से नहर की साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य गुणवत्ता के साथ कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने संवाददाता को बताया कि नारोली माइनर नहर के लिए राजस्थान सरकार के सिंचाई विभाग ने करोड़ों रुपये की राशि जारी कर कार्य कराने का ठेका दिया है। ग्रामीणों के अनुसार ठेकेदार ने नहर की साफ-सफाई में गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं दिया है। इससे ठेकेदार एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों के प्रति ग्रामीणों में भारी रोष है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस नारोली माइनर लिंक नहर का निर्माण दो सौ वर्ष पूर्व कराया गया था। तब से आज तक इस माइनर लिंक नहर की कोई साफ-सफाई का कार्य नहीं कराया गया है, जिससे इस माइनर नहर की हालत बद से बदतर बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार कुछ लोगों ने नारोली की तरफ जाने वाली इस नहर की पटरियों को काटकर खेतों में मिला लिया, जिससे नहर की पटरियों का नामोनिशान नहीं रहा है। इसके बावजूद साफ-सफाई करने वाले ठेकेदार की ओर से इस माइनर नहर की पटरियों को भी सही नहीं किया गया है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि माइनर नहर की साफ-सफाई का सुपरविजन सिंचाई विभाग के किसी भी अधिकारी की ओर से नहीं किया जा रहा है। राजस्थान सरकार के सिंचाई विभाग के अधिकारियों की ओर से नहर की साफ-सफाई के समय कोई मॉनिटरिंग नहीं किए जाने के कारण, ग्रामीणों के अनुसार, नहर की साफ-सफाई और मरम्मत करने वाले ठेकेदार की ओर से कार्य के नाम पर लीपापोती की जा रही है।
स्टीमेट के बारे में सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता मधुर गोयल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कुम्हेर आकर स्टीमेट देख लो या शासन सचिवालय से मंगवा लो। हालांकि, साफ-सफाई के कार्य के संबंध में उन्होंने कोई संतुष्टिपूर्ण जवाब नहीं दिया।
नहर की स्थिति, स्वीकृत करोड़ों रुपये की राशि और कराए जा रहे मरम्मत एवं साफ-सफाई कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग से कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग रखी है।