तस्वीर में लाल साड़ी पहने महिला बारां कलेक्ट्रेट के बाहर माइक पर बात करती हुई।

बारां। बारां और बामला सीएलएफ में कथित भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, मनमाने खर्च और महिलाओं के मानसिक उत्पीड़न के आरोपों को लेकर ग्राम संगठनों और समूहों से जुड़ी महिलाओं ने जिला कलेक्टर बालमुकुंद असावा को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। महिलाओं ने आस्था राजीविका सर्वांगीण विकास सहकारी समिति लिमिटेड बामला (सीएलएफ) और सूरज सीएलएफ बारां की मैनेजर तथा अन्य कार्मिकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

राजेंद्र शर्मा के अनुसार, इकलेरा निवासी पार्वती मेरोठा, बैंगना निवासी सुनीता मीणा और अन्य ग्रामीण महिलाओं ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सीएलएफ मैनेजर और अन्य अधिकारी अपने पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग कर कैडरों और ग्रामीण महिलाओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं। इससे संस्था का माहौल खराब हो रहा है।

ज्ञापन में आस्था सीएलएफ बामला की मैनेजर पर पैसे निकालकर घूमने जाने और मनमाने तरीके से खर्च करने का आरोप भी लगाया गया है। महिलाओं का कहना है कि ग्राम संगठन इकलेरा में महिलाओं के चेक काटने के एवज में निजी तौर पर 500 रुपये लिए जाते हैं। आरोप है कि इस राशि को संस्था में जमा कराने के बजाय निजी खर्चों में उपयोग किया जाता है।

पीड़ित महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि मैनेजर की मनमानी के चलते लखपति सीआरपी और लोकेश कैडर को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। ज्ञापन में कहा गया कि विरोध करने पर महिलाओं के चेक नहीं काटने और उन्हें डराने-धमकाने जैसी बातें भी सामने आई हैं।

महिलाओं ने जिला कलेक्टर से पूरे मामले की शीघ्र और निष्पक्ष जांच कराने, आरोपों में दोषी पाए जाने वाले मैनेजर एवं अन्य कार्मिकों को उनके पदों से हटाने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगी। अब मामले में प्रशासन की जांच और कार्रवाई को लेकर महिलाओं की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं।

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