मोर्शी-वरुड क्षेत्र में उचित भाव न मिलने से सड़क पर पड़े संतरे।

अमरावती जिले के मोर्शी-वरुड क्षेत्र में अकाल जैसी परिस्थितियों और गिरते जलस्तर के कारण संतरा उत्पादक किसान परेशानियों का सामना कर रहे हैं। बागानों में लगाई गई लागत तक नहीं निकल पाने और बाजार में उचित भाव नहीं मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। इस स्थिति को देखते हुए राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस के तालुका अध्यक्ष रुपेश वाळके ने नांदेड के संतरा प्रकल्प को मोर्शी में स्थानांतरित करने की मांग की है।

रुपेश वाळके ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को निवेदन देकर मोर्शी-वरुड क्षेत्र के संतरा उत्पादक किसानों की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने क्षेत्र में किसानों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए संतरा उत्पादकों को राहत देने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

निवेदन में किसानों को सिंचाई के लिए पानी और बिजली उपलब्ध कराने के साथ ही संतरे की बिक्री के लिए उचित व्यवस्था करने की मांग भी की गई है। अकाल जैसी परिस्थितियों और घटते जलस्तर के बीच संतरे की खेती करना किसानों के लिए चुनौती बन गया है। किसानों को बागानों में लगाई गई लागत भी वापस नहीं मिल पा रही है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ रही है।

बाजार में उचित भाव नहीं मिलने के कारण कई बार किसानों को संतरे सड़क पर फेंकने तक की नौबत आ चुकी है। ऐसे हालात में संतरा उत्पादकों को आर्थिक नुकसान से बचाने और उनकी उपज की बिक्री की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए रुपेश वाळके ने नांदेड के संतरा प्रकल्प को मोर्शी में स्थानांतरित करने की मांग उठाई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपे गए निवेदन के माध्यम से उन्होंने क्षेत्र के संतरा उत्पादक किसानों को आर्थिक सहायता, सिंचाई के लिए पानी-बिजली और संतरा बिक्री की व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।

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